मसौढ़ी : शहीद संजय को अश्रुपूर्ण आंखों से परिजनों और शहरवासियों ने दी अंतिम विदाई

वंदे मातरम व शहीद संजय अमर रहें के नारों से गूंजी मसौढ़ी : शहीद संजय कुमार सिन्हा का पार्थिव शरीर शनिवार को दोपहर पटना से मसौढ़ी पहुंचते ही शहरवासियों की आंखें छलक पड़ीं. प्रखंड कार्यालय के पास सड़क के दोनों तरफ प्रतीक्षा कर रहे लोगों ने दोपहर करीब 1:03 बजे सीआरपीएफ के वैन पर शहीद […]

वंदे मातरम व शहीद संजय अमर रहें के नारों से गूंजी
मसौढ़ी : शहीद संजय कुमार सिन्हा का पार्थिव शरीर शनिवार को दोपहर पटना से मसौढ़ी पहुंचते ही शहरवासियों की आंखें छलक पड़ीं. प्रखंड कार्यालय के पास सड़क के दोनों तरफ प्रतीक्षा कर रहे लोगों ने दोपहर करीब 1:03 बजे सीआरपीएफ के वैन पर शहीद संजय का पार्थिव शरीर पहुंचते ही फूल अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी.
पूरा वातावरण वंदे मातरम् व शहीद संजय अमर रहे के नारों से गूंज उठा. पार्थिव शरीर के प्रखंड कार्यालय में पहुंचते ही वहां इंतजार कर रहे एसडीजेएम हरे राम, मुंसिफ सह प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रंजय कुमार व प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी, जिला पदाधिकारी कुमार रवि, एसएसपी गरिमा मल्लिक, एसडीओ संजय कुमार आदि लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया. पार्थिव शरीर के साथ काफिला घर के लिए चल पड़ा. घर के बाहर शहीद की मां राजमणि देवी, पिता महेंद्र सिंह, पत्नी बेबी देवी, पुत्री रूबी कुमारी और टुन्नी कुमारी व पुत्र ओमप्रकाश समेत अन्य परिजनों ने पुष्पांजलि अर्पित की. इसके बाद केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद व केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री रामकृपाल यादव, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह आदि ने श्रद्धांजलि दी.
1:03 बजे दोपहर शहीद का शव पटना से सीआरपीएफ के वाहन से पहुंचा मसौढ़ी प्रखंड कार्यालय.
बजे मसौढ़ी प्रखंड कार्यालय से पिकअप वैन पर पार्थिव शरीर शहीद के घर के लिए रवाना.
बजे शहीद संजय के घर तारेगना मठ पहुंचा पार्थिव शरीर.
बजे शहीद के घर से शहर में लोगों के दर्शनार्थ लिए निकला पार्थिव शरीर.
बजे मसौढ़ी शहर से धनरूआ के लिए प्रस्थान किया पार्थिव शरीर.
बजे धनरूआ पंचायत भवन पहुंचा पार्थिव शरीर. धनरूआ प्रखंड कार्यालय पहुंचा पार्थिव शरीर. बजे धनरूआ प्रखंड कार्यालय से अंतिम दाह- संस्कार के लिए फतुहा रवाना हुआ पार्थिव शरीर .
अपने बेटे शहीद संजय कुमार सिन्हा की शहादत पर उनके पिता महेंद्र को नाज है. लेकिन उन्हें देश की सरकार से आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाने की उम्मीद है, ताकि फिर कभी कोई भारत की ओर नजर उठाने की हिमाकत न कर सके. उन्हें अपने व अपने शहीद बेटे के विधवा का भरण-पोषण, उनके इकलौते पुत्र की पढ़ाई व उनकी दोनों पुत्रियों की शादी की चिंता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >