थीसिस में प्लेगरिज्म को रोकने को लेकर पीयू में वर्कशॉप
एक फरवरी से प्लेगरिज्म जांच से गुजरेगा हर थीसिस
पटना : एक फरवरी से अब हर रिसर्च स्कॉलर की थीसिस प्लेगरिज्म (साहित्य चोरी) टेस्ट से गुजरेगी. पांच मिनट के भीतर अब तीन सौ पेज के थीसिस की जांच हो जायेगी. इसकी व्यवस्था पटना विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरी में की गयी है. छात्र पांच सौ रुपये की राशि देकर थीसिस जमा करने से पहले भी उसकी जांच करा सकते हैं.
अगर एक बार थीसिस फाइनल रूप से विवि में जमा हो गयी और उसमें 20 प्रतिशत से अधिक प्लेगरिज्म पायी गयी तो उसे तत्काल रद्द कर दिया जायेगा. विवि के द्वारा प्लेगरिज्म पर आयोजित वर्कशॉप में ये बातें विशेषज्ञों ने कहीं. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो रास बिहारी सिंह ने कहा कि रिसर्च स्कॉलर थीसिस लिखते समय ईमानदारी बरतें.
सुपरवाइजर पर भी होगी कार्रवाई : सेंट्रल लाइब्रेरी के इंचार्ज प्रो रविंद्र कुमार ने कहा कि जांच में दोषी पाये जाने पर रिसर्च स्कॉलर के साथ ही संबंधित सुपरवाइजर पर भी कार्रवाई हो सकती है. इसलिए सुपरवाइज करनेवाले ध्यान रखेंगे कि किसी भी कीमत पर प्लेगरिज्म न हो.
अगर विवि से यह किसी तरह से पास हो भी गया तो यूजीसी के द्वारा भी इसकी जांच रैंडमली का जा सकती है. चोरी पाये जाने पर वहां से भी थीसिस रिजेक्ट हो सकता है. इस मौके पर प्रतिकुलपति प्रो डॉली सिन्हा, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन प्रो एनके झा, रजिस्ट्रार मनोज मिश्र, शोभन चक्रवर्ती, प्रो बीके मिश्र समेत कई लोग मौजूद थे.
साहित्य के संबंध में साभार जरूर दें
वर्कशॉप में बीएन कॉलेज के प्राचार्य ने प्लेगरिज्म पर बताया कि एक लाइन की चोरी भी चोरी है. साहित्य को लेकर काम करने में बुराई नहीं, क्योंकि यह रिसर्च का पार्ट है कि आप कुछ खोजते हैं, बहुत सारे साहित्यों का अध्ययन करते हैं और इसलिए उनका उद्धरण जरूरी होता है.
लेकिन, आप जिस भी साहित्य से मदद ले रहे हैं, उसका संदर्भ/साभार जरूर दें. प्रो अशोक कुमार झा ने भी विस्तार पूर्वक प्लेगरिज्म के संबंध में यूजीसी के नियमों की जानकारी दी.
