क्या आपकी कफन में जेब है डॉक्टर साहब! दो लाख तक वेतन लेकिन दो घंटे भी नहीं देते अस्पताल को

आनंद तिवारी पटना : कहते हैं कफन में जेब नहीं होती. लेकिन, डॉक्टर साहब क्या अापकी कफन में जेब है? 1.60 लाख से दो लाख रुपये महीना तक वेतन उठाते हैं, लेकिन जिस अस्पताल में नौकरी है, उसको ढाई घंटे भी नहीं दे पाते. सूबे के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) इसका […]

आनंद तिवारी
पटना : कहते हैं कफन में जेब नहीं होती. लेकिन, डॉक्टर साहब क्या अापकी कफन में जेब है? 1.60 लाख से दो लाख रुपये महीना तक वेतन उठाते हैं, लेकिन जिस अस्पताल में नौकरी है, उसको ढाई घंटे भी नहीं दे पाते. सूबे के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) इसका उदाहरण है, जहां किसी दिन औचक जांच हो तो अधिकतर सीनियर डॉक्टर गायब मिलेंगे.
कारण वही सर्वविदित. निजी अस्पतालों के प्रति निष्ठा. लेकिन, क्या आपकी इस निष्ठा के लायक वे मरीज नहीं हैं, जो सुदूर जिलों से बड़ी उम्मीदें लेकर सरकारी अस्पताल तक पहुंच जाते हैं. हाजिरी बनायी, फिर दूसरी गाड़ी से निकल लिये : डॉक्टर साहब, पिछले दिनों पीएमसीएच में आपकी दिनचर्या को समझने का मौका मिला. पाया कि कई सीनियर (डॉक्टर) अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचे, हाजिरी बनायी, फिर अपनी गाड़ी परिसर में ही छोड़ दूसरी गाड़ी से निकल गये.
बायोमीट्रिक की वजह से ऐसी हाजिरी की मजबूरी हो गयी है. माना कि निजी नर्सिंग होम में डिमांड के हिसाब से आपकी कमाई है. लेकिन, यह कमाई आप कितना जमा कर पायेंगे, और कितना साथ ले जायेंगे? दवा कंपनियों के ‘टूर प्रोग्राम’ से फुर्सत मिले तो यह भी सोचियेगा कि जो इंसान आपको धरती का भगवान समझते हैं, उनकी आकांक्षाओं पर आप कितने खरा उतर पा रहे हैं.
ओटी से इनडोर तक अनुपस्थिति का असर
डॉक्टर साहब, आपकी अनुपस्थिति का असर ऑपरेशन थियेटर से लेकर इनडोर केयर पर साफ दिखता है. पीएमसीएच में छह रूटीन ऑपरेशन थियेटर संचालित हैं. इसके अलावा इमरजेंसी वार्ड के ऊपर न्यूरो ओटी, लेबर ओटी 24 घंटे चलता है. लेकिन, रूटीन ओटी दोपहर एक बजे ही बंद हो जाते हैं. इसके पीछे मामला है कि डॉक्टर साहब जानबूझ कर ही कम केस लेते हैं, ताकि ओटी जल्द बंद कर जल्दी निकल जाये.
आपकी मांग जायज, पर उनकी उम्मीदों का क्या ?
डॉक्टर साहब, आपको सरकार से डायनेमिक एसीपी, वेतनमान, महंगाई भत्ता के साथ ही पीड़ित अवस्था में पहुंचे मरीजों के परिजनों से सुरक्षा की गारंटी भी चाहिए. आपकी मांग बिल्कुल जायज है. लेकिन, उन मरीजों का क्या, जो मांग नहीं, बस उम्मीद लेकर आते हैं कि आपका हाथ लगते ही उनके दुख-दर्द दूर हो जायेंगे? क्या उनको यह उम्मीद करने का अधिकार भी नहीं? आप कम-से-कम उनको मिलने वाला समय ही उन्हें दे दें.
ऐसे आदर्श लेकर जूनियर बनेंगे सीनियर!
डॉक्टर साहब, यह भी देखिए कि आप विरासत में क्या छोड़े जा रहे हैं? आप संस्थान के भविष्य के डॉक्टर (अभी जूनियर) के समक्ष कैसा आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं! शायद यही वजह तो नहीं कि जूनियर डॉक्टरों के मन में मरीजों के प्रति रूखापन देखने को मिलता है. अस्पताल में आपकी महज उपस्थिति संस्थान की चिकित्सा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है. जूनियर डॉक्टरों के आंदोलनों ने यह साबित भी किया है कि पीएमसीएच सीनियरों के बजाय जूनियरों पर कितना निर्भर है.
हाजिरी बनायी, फिर दूसरी गाड़ी से निकल लियेछह दिन से डीएमसीएच था ठप
डीएमसीएच, दरभंगा में भी परीक्षा केंद्र बदलने की मांग को लेकर छह दिनों से इलाज ठप थी. इस दौरान सात मरीज की मौत भी हो गयी. हालांकि शनिवार को जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी. एमबीबीएस फाइनल इयर के छात्रों ने परीक्षा केंद्र नहीं बदले जाने पर देर शाम एसकेएमसीएच की इमरजेंसी सेवा ठप करा दी. रजिस्ट्रेशन बंद होने से इलाज के लिए पहुंचे कई मरीज वापस लौट गये. हालांकि एक घंटे बाद ही अधीक्षक के कहने पर छात्र मान गये.
जूनियर डॉक्टरों की बदौलत ही पीएमसीएच चल रहा है. कुछ तो सीनियर डॉक्टर ठीक हैं, पर कुछ ऐसे भी हैं, जो हमलोगों को ऑर्डर देकर चले जाते हैं. अगर जूनियर के साथ-साथ सीनियर भी पूरा समय अस्पताल में दें तो मरीज व जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद नहीं होगा व इलाज अच्छी तरह से होगा.
डॉ शंकर भारतीय, अध्यक्ष, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, पीएमसीएच.
तय ड्यूटी अवधि में सभी प्रोफेसर, डॉक्टर व कर्मियों को रहना अनिवार्य है, ताकि पढ़ाई व इलाज दोनों सही रूप से संचालित हो. चूंकि अभी हाल ही में मैंने पदभार ग्रहण किया है, इसलिए कुछ अधिक नहीं बता सकता हूं. लेकिन जल्द ही पीएमसीएच की सभी व्यवस्थाएं ठीक हो जायेंगी.
डॉ रामजी प्रसाद सिंह, प्रिंसिपल, पीएमसीएच.

हाल पीएमसीएच का
कुल विभाग 30
हेड ऑफ डिपार्टमेंट 30
प्रोफेसर 60
जूनियर डॉक्टर व
सीनियर रेजीडेंट 600
सीनियर डॉक्टर 315 कुल टीचर
रोजाना मरीज 2100 से 2400
इमरजेंसी में बेड 225
बेडों की कुल संख्या 2000

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