जिला परिषद को दो वर्ष से भवन का इंतजार
पटना : जिला परिषद का हाल बेहाल है. बीते एक वर्ष में केवल बजट पास करने के अलावा कोई भी बैठक नहीं की गयी है. हालत ऐसी है कि जिला परिषद ने एक भी योजना अपने स्तर से पास नहीं की है. सड़क निर्माण, भवन निर्माण, डाकबंगलों की मरम्मत से लेकर कई विकास योजनाएं वर्षों से लंबित पड़ी हुई हैं. परिषद को लेकर सबसे बड़ी बात यह है कि जिला परिषद सदस्यों के लिए अपना कोई भवन भी नहीं है. दो वर्ष पहले मरम्मत के लिए तोड़ा गया भवन विकास की बाट जोह रहा है.
टूटा हुआ भवन दो वर्ष से ऐसे ही पड़ा हुआ है. बीते वर्ष मार्च में जिला परिषद की बजट बैठक हुई थी. इसमें 92 लाख 11 हजार का बजट पास किया गया था. 2017 में जिला परिषद के भवन के मरम्मत की योजना बनी थी. इसमें जिला परिषद ने अपने बजट से कलेक्ट्रेट परिसर स्थित परिषद भवन के छत को तोड़ कर नया छत बनाने की योजना को पास किया था. इस काम में कुल 76 लाख रुपये की राशि खर्च की जानी थी.
इसके लिए भवन को तोड़ने का काम भी शुरू कर दिया गया था. छत को हटाने का काम भी पूरा कर लिया गया, लेकिन बाद में परिषद के विपक्षी सदस्यों ने इसमें घोटाले का अारोप लगाया. इसके बाद मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी ने जांच के निर्देश दिये. परिषद से सभी कागजातों को मुहैया कराया गया, लेकिन बाद में कोई निर्देश या निर्णय सामने नहीं आया.
जनवरी में बैठक होने की उम्मीद
जिला परिषद के अध्यक्ष अंजू देवी ने बताया कि बैठक के लिए संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी को लिखा जाता रहा है, लेकिन बैठक नहीं की गयी है. पहले बजट पास करने और फिर अविश्वास प्रस्ताव के बाद कोई बैठक नहीं हुई. कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिया जाना है. जनवरी में बैठक हो सकती है.
