पटना : जिस जगह पर बोरिंग गाड़ने का काम होगा उससे पहले वहां जमीन के नीचे पानी की जांच होगी. जांच कर यह पता लगाया जायेगा कि बोरिंग गाड़ने पर कितने दिनों तक वह कारगर रहेगा. यानि पानी का लेयर घटने पर भी कितना रहेगा. ताकि बोरिंग फेल नहीं करे. इससे बोरिंग गाड़ने के बाद पानी नहीं मिलने की शिकायत नहीं रहेगी.
पानी की जांच टेरामीटर से कर पता लगाया जायेगा कि जमीन के भीतर किस जगह पानी की उपलब्धता अधिक है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग 15 जिले नालंदा, रोहतास, कैमूर, गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, शेखपुरा व लखीसराय में जमीन के भीतर जिओफिजिकल सर्वेक्षण करा कर पानी की मात्रा की जांच करायेगी.
जिओफिजिकल सर्वेक्षण से ऐसे जगहों को चिहिंत कर वहां बोरिंग गाड़ने का काम होगा. टेरामीटर सेइससे बचने के लिए विभाग ने टेरामीटर से जमीन के भीतर पानी की उपलब्धता की जांच के लिए जिओफिजिकल सर्वेक्षण करा रही है. पानी की मात्रा जांच कराने पर लगभग नौ लाख रुपये खर्च होंगे.
दक्षिण बिहार में पठारी इलाके सहित अन्य जगहों पर पानी की समस्या अधिक है. यहां तक कि पानी के लिए बोरिंग गाड़ने पर गर्मी के दिनों में बोरिंग काम करना बंद कर देता है. ऐसे इलाके में बोरिंग गाड़ने में होनेवाले खर्च के बाद कांट्रैक्टर दूसरी जगह बोरिंग गाड़ने में आनाकानी करता है. नतीजा उस इलाके में लोगों को जलापूर्ति सुविधा नहीं मिलती है.
