पटना : छोटी होती जा रही गंगा की गोद, सर्दियों में दम तोड़ रही गंगा की धार

हर माह आधा मीटर घट रहा जल स्तर पटना : इस साल सर्दियों में ही गंगा की धार दम तोड़ रही है. सर्दियों में गंगा की जल धारा की औसत रफ्तार तीन मीटर प्रति सेकेंड से घटकर एक से डेढ़ मीटर प्रति सेकेंड रह गयी है. यही नहीं पटना के गांधी घाट परिक्षेत्र में गंगा […]

हर माह आधा मीटर घट रहा जल स्तर
पटना : इस साल सर्दियों में ही गंगा की धार दम तोड़ रही है. सर्दियों में गंगा की जल धारा की औसत रफ्तार तीन मीटर प्रति सेकेंड से घटकर एक से डेढ़ मीटर प्रति सेकेंड रह गयी है. यही नहीं पटना के गांधी घाट परिक्षेत्र में गंगा के पाट की (चौड़ाई) भी कम हुई है. यहां गंगा के पाट की न्यूनतम चौड़ाई 300 मीटर और अधिकतम 700 मीटर रह गयी है. हालात यह है कि गांधी घाट पर गंगा के जल स्तर में हर दो माह में सवा मीटर से अधिक की कमी आ रही है.
जल स्तर में आ रही गिरावट के इस ट्रेंड से मार्च, 2019 में पिछले साल की तुलना में गांधी घाट पर जल स्तर करीब एक मीटर नीचे तक जा सकता है. दरअसल पटना के गांधी घाट पर पिछले पांच सालों से गंगा के जल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आयी है. गंगा की इस स्थिति के लिए पर्यावरण के जानकार जलवायु को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. हालांकि, जल संसाधन विभाग के आधिकारिक आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं कि एक दशक पहले तक पटना में गंगा का औसत पाट 1.2 किलोमीटर चौड़ा था. जल धारा की कमजोर रफ्तार के फेर में जेपी सेतु के पास गंगा दो फांक में बंट चुकी है.
सर्दियों में पिछले एक दशक से लगातार नीचे जा रहा जल स्तर
गंगा नदी में जल स्तर में आयी गिरावट चिंताजनक है. इसमें लगातार कमी भी हो रही है. अलबत्ता ये रातों-रात नहीं हुआ है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक गंगा नदी में मार्च महीने में जल स्तर सबसे कम होता है. हालात यह है कि इस साल मार्च के माह में अब तक के न्यूनतम जल स्तर 41 मीटर से हर हाल में कम रहने के पुख्ता संकेत हैं.
वर्ष जल स्तर
6 मार्च, 2014 41. 920
2 मार्च, 2015 41. 920
10 मार्च, 2016 41. 200
18 मार्च, 2017 41.600
28 मार्च, 2018 41.00
1 नवंबर, 2018 43. 61
(बरसात बाद)
30 दिसंबर, 2018 42. 34
30 मार्च, 2019 40.42
अनुमानित (प्रति माह 0.635 मीटर के घटते ट्रेंड के मुताबिक)
– इसलिए घट रहा जल स्तर : गंगा नदी में घटता जल स्तर चिंता की बात है. इसकी सहायक नदियां खासतौर पर चंबल, सोन, गंडक व घाघरा का पानी ही इसे सदानीरा बनाये हुए है. इसके कैचमेंट में बारिश की लगातार कमी आ रही है. उदाहरण के लिए बिहार में गंगा नदी के कैचमेंट में करीब 26 फीसदी कम बारिश हुई है.
प्रभाव…
– भू-जल घटेगा
– सिंचाई बाधित होगी
– पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा, क्योंकि बिहार के क्लाइमेंट पर इस नदी का सर्वाधिक असर पड़ता है
– गंगा की चौड़ाई और पानी घटने से पीएम 2.5 का कोप अधिक हो जायेगा
– गंगा के निकटवर्ती इलाकों में होने वाली खेती विशेष तौर पर सब्जी उत्पादन पर सबसे ज्यादा असर
– मछली उत्पादन पर असर
पटना
परिक्षेत्र में गंगा नदी में तेजी से पानी नीचे उतर रहा है. धार भी काफी कमजोर हो गयी है. दरअसल जलवायु बदलाव के चलते ये हालात बन रहे हैं. इस साल मार्च में इसका जल स्तर और नीचे जाने की आशंका है.
-राजेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग, पटना

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