बीएड कॉलेज. धांधली करने के लिए अपनाते हैं तिकड़म
पटना : राज्य में निजी बीएड कॉलेजों की धांधली और मनमानी इस तरह से है कि ये छात्रों को तो धोखा देते ही हैं, विश्वविद्यालय और एनसीटीइ (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) के पदाधिकारियों को भी हर तरह से समझाने में पीछे नहीं रहते हैं.
इसके चलते विश्वविद्यालय स्तर या सरकारी महकमा के अधिकारियों को भी कई कॉलेजों की गड़बड़ी की जानकारी होते हुए भी कोई सख्त और ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है. पटना और आसपास के इलाके में कुछ निजी बीएड कॉलेज ऐसे हैं, जिन्होंने बीएड कोर्स के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) मगध विश्वविद्यालय से ले रखा है. जबकि डिग्री महाराष्ट्र के एक विश्वविद्यालय की बांट रहे हैं. एनसीटीइ की वेबसाइट पर इस कॉलेज के सामने संचालन वाले कॉलम में मगध विश्वविद्यालय ही दर्ज है. जबकि हकीकत में यहां के छात्रों को दूसरे विश्वविद्यालय की डिग्री बांटी जा रही है.
नियमानुसार, जिस विश्वविद्यालय से कोई संस्थान एनओसी लेता है, उसी विश्वविद्यालय से उसे मान्यता लेनी होती है. इस संस्थान ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि दो बीएड कॉलेज एक ही भवन में चल रहा है. अगर एक ही विश्वविद्यालय से दोनों की जांच करवाते, तो फंस सकते थे. इससे बचने के लिए दो अलग-अलग विश्वविद्यालय का तिकड़म लगा कर इसका संचालन किया जा रहा है. इस तरह के दर्जनों मामले हैं.
मान्यता लेने के लिए करते हैं फर्जीवाड़ा
निजी बीएड कॉलेज वालों को पहले एनसीटीइ फिर राज्य के संबंधित विश्वविद्यालय से मान्यता लेनी पड़ती है. परंतु मान्यता लेने में कॉलेज वाले कई तरह के तिकड़म लगाते हैं. टीम को किसी दूसरे का भवन दिखा कर कहीं दूसरे स्थान के लिए कॉलेज की मान्यता ले लेते हैं. दो या तीन सदस्यीय टीम में अक्सर दूसरे राज्य के लोग होते हैं, जिन्हें यहां की स्थानीयता की बहुत जानकारी नहीं हो पाती है. इसके साथ ही कुछ आपसी सहमति से भी इनकी सेटिंग बन जाती है. दूसरे राज्य से आकर भी राज्य के विभिन्न जिलों में निजी बीएड कॉलेज खोले जाने की सूचना विभाग को मिली है.
गड़बड़ी की जानकारी होते हुए भी कार्रवाई नहीं
तमाम निजी बीएड कॉलेजों में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी देने के लिए शिक्षा विभाग के पदाधिकारी विजिट भी करते हैं. इन्होंने एनसीटीइ की वेबसाइट से सभी संस्थानों की लिस्ट निकाल कर वहां जाकर इसकी जानकारी देने की मुहिम शुरू की. इस क्रम में यह पता चला कि एक ही भवन में दो या तीन कॉलेज चल रहे हैं. कहीं-कहीं कभी क्लास ही नहीं चलते. छात्र सिर्फ परीक्षा देने ही कॉलेज आते हैं.
भवन तो बड़े हैं, लेकिन उन पर हमेशा ताला ही लटका रहता है. गड़बड़ियों की सूचना इस टीम ने शिक्षा विभाग को सौंप दी. परंतु सीधे शिक्षा विभाग का कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होने से यह मामला वैसा ही रह गया
