नयी दिल्ली/पटना : एनडीए से नाराज चल रही लोजपा की ओर से भाजपा को खुली चुनौती देने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है. लोजपा ने बीजेपी को 31 दिसंबर तक सीट शेयरिंग का काम पूरा कर लेने की चेतावनी दी. इस बीच कांग्रेस सांसद ने लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान और चिराग पासवान पर तंज कसा है. कांग्रेस सांसद रणजीत रंजन ने कहा कि चिराग पासवान जी और पासवान जी ने मौसम के मिजाज को समझा लीया है. और अब वो डूबती हुई नैया में पांव नहीं रखना चाहते है और उन्हें एहसास हो चुका है की जो मुद्दे ये एनडीए के साथ लेकर चल रहे हैं वो गलत है. वहीं, महागठबंधन में लोजपा के शामिल होने को लेकर पूछे गये सवाल के जवाब में रणजीत रंजन ने कहा कि वैसे तो ये तय आलाकमान करती है. लेकिन, अगर वे आना चाह रहे हैं तो मुझे लगता है कि हमारे दरवाजे खुले हैं और हम स्वागत करेंगे.
विदित हो कि रामविलास पासवान के भाई और उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने बुधवार को पटना में बकायदा पत्रकार वार्ता कर बीजेपी को 31 दिसंबर तक सीट शेयरिंग का काम पूरा कर लेने की चेतावनी दी थी. पारस ने साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी को 7 सीटों में एक भी कम मंजूर नहीं है. पशुपति पारस ने कहा था कि बीते चार सालों में पार्टी का विस्तार हुआ है और इसके नेताओं की लोकप्रियता भी बढ़ी है. इसलिए हम बिहार के साथ ही झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी लोकसभा चुनाव में सीटों की मांग करते हैं.
इसके साथ ही चिराग पासवान के चाचा और बिहार सरकार में मंत्री पशुपति कुमार पारस ने अपने भतीजे के ट्वीट को बिल्कुल सही बताया है. लोजपा के इस तेवर के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारे में हलचल बढ़ा दी है. इससे पहले मंगलवार को लोजपा के नेता चिराग पासवान ने दो ट्वीट लीख कर अपना रुख साफ किया. चिराग ने अपने पहले ट्वीट में लिखा है, गठबंधन की सीटों को लेकर कई बार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से मुलाकात हुई, परंतु अभी तक कुछ ठोस बात आगे नहीं बढ़ पायी है. इस विषय पर समय रहते बात नहीं बनी तो इससे नुकसान भी हो सकता है. चिराग पासवान ने अपने एक अन्य में ट्वीट में लिखा, ‘टीडीपी और आरएलएसपी के एनडीए गठबंधन से जाने के बाद यह गठबंधन नाजुक मोड़ से गुजर रहा है. ऐसे समय में भाजपा गठबंधन में फिलहाल बचे हुए साथियों की चिंताओं को समय रहते सम्मानपूर्वक तरीके से दूर करें.’
गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव बिहार में भाजपा, लोजपा और रालोसपा मिलकर चुनाव लड़े थे. लोजपा को कुल सात सीटों पर चुनाव लड़ी थी और छह पर उसे जीत मिली थी. वहीं रालोसपा तीन पर चुनाव लड़ी थी और सभी सीटें जीतने में कामयाब रही थी. इस बार सीटों के बंटवारे पर नाराज चल रहे उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए का साथ छोड़ दिया है. ऐसे में अगर लोजपा भी एनडीए का साथ छोड़ती है तो भाजपा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
