अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़
पटना : लोग इन दिनोंत्वचा में हो रहे लाल दाने के बाद पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान आदि सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों के त्वचा रोग विभाग के डॉक्टरों से इलाज कराते देखे जा रहे हैं. पीएमसीएच और एनएमसीएच में करीब 10 प्रतिशत मरीज इस रोग के पहुंच रहे हैं. त्वचा रोग के डॉक्टरों की मानें तो अधिकांश मरीजों को हर्पीस जोस्टर नाम की बीमारी देखने को मिल रही है. इसके अलावा संक्रमण व एलर्जी के कारण भी मरीजों में लाल दाने हो रहे हैं.
खुजली के साथ पड़ते हैं चकते : लाल दाने वाले मरीजों में खुजली होती है और फिर त्वचा में चकत्ते पड़ना, जलन होना आदि समस्याएं देखने को मिलती हैं. एनएमसीएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ विकास शंकर ने बताया कि यह बीमारी चिकन पॉक्स के वायरस वेरिसेला जोस्टर वायरस के कारण होती है. शरीर पर एक जगह दाने निकलने पर रोगी को दर्द और बुखार हो जाता है. डॉ विकास ने कहा कि यह एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए सावधानी काफी जरूरी है.
आमतौर पर यह बीमारी उसी व्यक्ति को होती है, जिसे पहले चिकन पॉक्स हो चुका होता है. अगर यह वेरिसेला जोस्टर वायरस पहले से ही आपके शरीर में मौजूद है, तो आप इस बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं. चिकन पॉक्स ठीक होने के बाद यह वायरस नर्वस सिस्टम में चला जाता है और वर्षों तक वहीं निष्क्रिय रह सकता है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना है कारण
डॉ विकास शंकर ने बताया कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, तो यह वायरस तंत्रिका मार्गों से होता हुआ हमारी त्वचा तक पहुंच जाता है. उम्र के साथ इसका खतरा बढ़ता जाता है. इस बीमारी के होने पर रोगी के शरीर के एक तरफ की त्वचा पर पानी वाले दाने निकलते हैं.
इस वजह से रोगी को त्वचा में खुजली या दर्द या जलन या सुन्न पड़ना या झनझनाहट की परेशानी होती है. जिस जगह ये दाने निकलते हैं, वहां की त्वचा बेहद संवेदनशील हो जाती है और उसे छूने पर दर्द होता है. रोग के ठीक होने में 10-12 दिन का समय लगता है. डॉक्टर इसके लिए एंटी वायरस दवा रोगी को देते हैं.
