कलाकारों ने ‘पोषण का राज’ में कुपोषण से बचने का तरीका बताया और दी सलाह
खगौल : नाट्य संस्था संपूर्ण कल्याण विकास समिति की ओर से डाक बंगला बाजार परिसर में ‘पोषण का राज’ पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया.
नाटक की शुरुआत इंद्रजीत गोस्वामी के लिखे गीत देवानंद के स्वर कामता दास एवं साथियों से बाहर का भोजन बंद करें और घर का भोजन ग्रहण करें से किया.ज्ञानी प्रसाद द्वारा लिखित व निर्देशित पोषण का राज के माध्यम से कुपोषण को नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया कि ज्यादा- से- ज्यादा अपने घर में बने भोजन को ही ग्रहण करें.
शुद्ध व पौस्टिक आहार, मावा काजू, किशमिश आदि ही हमारे शरीर को पोषण देने में पूरी तरह से सक्षम हैं. आज के दौर में विशेष कर महिलाएं और बच्चे नियमित तौर पर मोमो, बर्गर, चाऊमिन आदि पर ज्यादा चोट कर रहे हैं, जो हमारे यहां की जलवायु के हिसाब से सही नहीं हैं. यह न तो पचने में आसान है और न ही हमारे पूर्ण शरीर पोषण ही दे पाता है. नाटक के अंश में दिखाया गया कि एक गर्भवती महिला भी चाइनीज फूड खाने की शौकीन थी.
फलस्वरूप उसका बच्चा कुपोषित पैदा हुआ है. नाटक के अंत में संस्था के संरक्षक मिथिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि नाटक के विभिन्न अंशों में जो घटनाएं घटित हुईं, इससे आप सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं. फिर भी आप सभी के आस-पड़ोस में ऐसी घटनाएं घटित होती हैं. तो क्यों न आप अपने खानपान की शैली बदल लें, ताकि आप भी स्वस्थ रहें.
