पटना : पटना नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या के 60 फीसदी लोग स्लम में रहते हैं. इनमें अधिकार लोग शहर की साफ-सुथरा रखने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन अपने ही क्षेत्र को साफ-सुथरा नहीं रख पाते हैं. अब स्लम में रहने वाले लोगों को सामाजिक व आर्थिक रूप से विकसित करने के लिए नगर निगम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत काम करेगा. इसको लेकर शुक्रवार को पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से आयोजित समारोह में नगर निगम व यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड(यूएनएफपीए) की बीच एग्रीमेंट किया गया.
इस एग्रीमेंट के तहत यूएनएफपीए विभिन्न स्टेक हॉल्डर के साथ मिल कर स्लम में काम करेगी और वहां रहने वाले लोगों के रहन-सहन में सुधार लायेगी.
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों व पार्षदों को संबोधित करते हुए यूएनएफपीए की एशिया डायरेक्टर जेनिफर बटलर ने कहा कि मैं आस्ट्रेलिया के रहने वाली हूं. जब मैं 19 वर्ष की थी तो पढ़ाई का खर्च पूरा करने के लिए शौचालयों की सफाई करती थी. इस काम में मुझे कभी शर्म महसूस नहीं हुआ. आज मेरा पोता छह वर्ष का है. पांच साल बाद उसे पटना लाकर दिखाऊंगी कि मैंने यहां क्या काम किया है.
स्मार्ट शहर का मतलब इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ व्यक्ति भी स्मार्ट : सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वयक व मैग्सेसे पुरस्कार विजेता बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि स्मार्ट शहर का मतलब है इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ व्यक्ति भी स्मार्ट हो.
उन्होंने कहा कि सफाई करने वालों को समाज में जगह नहीं मिलती है. शहर स्मार्ट तभी होगा, जब ये भी सामाजिक व आर्थिक रूप से स्मार्ट होंगे. मेयर सीता साहू ने कहा कि यह समझौता मील का पत्थर साबित होगा. डिप्टी मेयर विनय कुमार पप्पू ने कहा कि इसमें सिर्फ अधिकारी या पार्षद ही नहीं, बल्कि शहरवासी को शामिल होना होगा, तभी लक्ष्य पूरा होगा.
