पटना : त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थानों को सशक्त बनाने और इनमें योजनाओं की राशि को समुचित तरीके से खर्च करने के लिए एक विशेष पहल की गयी है. इसके तहत किसी योजना या अन्य किसी मद में राशि खर्च करने के लिए संबंधित पंचायती राज संस्थानों को बहुमत का सहारा लेना पड़ेगा.
संबंधित संस्थानों के प्रमुख यानी मुखिया, जिला परिषद अध्यक्ष, वार्ड प्रमुख समेत ऐसे अन्य प्रमुखों के स्तर से ही सिर्फ किसी राशि को खर्च नहीं किया जा सकेगा. इसके लिए सभी सदस्यों से सुझाव लेकर या बहुमत के आधार पर ही किसी राशि को खर्च किया जायेगा. किसी एक की मर्जी के स्थान पर सभी की समान मर्जी से राशि खर्च की जायेगी.
इससे जिन योजनाओं में सभी की रजामंदी होगी, उसी में सिर्फ राशि खर्च की जायेगी. इस मामले को लेकर पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने सभी जिलों के डीएम, डीडीसी और जिला पंचायती राज पदाधिकारियों को पत्र लिखा है.
इसमें कहा गया है कि किसी राशि के खर्च करने में किसी संस्थान के प्रमुख के बजाय बहुमत के आधार पर इसका निर्धारण किया जाये. इसमें सभी सदस्यों की सहभागिता और मत अनिवार्य रूप से लेना है. इसमें यह भी कहा गया है कि किसी योजना की राशि बहुमत के आधार पर खर्च करने के लिए जिला परिषदों, पंचायत समितियों और पंचायतों को अपनी वार्षिक कार्य योजना बनाते समय क्षेत्रीय संतुलन पर खासतौर से विचार करने के लिए कहा गया है.
अगर उनका कोई क्षेत्र या इलाका कम विकसित या पिछड़ा हुआ है, तो उनके मुताबिक अलग से योजना तैयार करके राशि का प्रावधान किया जाये. पंचायतों के समक्ष लाये गये किसी प्रस्ताव या मामलों के निर्णय में एकमत नहीं बनने की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाये.
