पटना : महादलितों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ कर उनके आर्थिक उत्थान के लिए सरकार उनका कौशल विकास करेगी. श्रम संसाधन विभाग की देखरेख में चलने लाले बिहार कौशल विकास मिशन को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है. मिशन पहले इस बात का पता करेगी कि किस-किस तरह के कौशल विकास की जरूरत है.
इसके लिए राज्य भर के महादलित टोलों में विकास मित्र जाकर सर्वे करेंगे. राज्य सरकार बिहार को कौशल विकास के बड़े हब के रूप में विकसित कर रही है. युवाओं का कौशल विकास चल रहा है. पिछले दिनों मुख्य सचिव के यहां बैठक हुई थी, जिसमें महादलितों के कौसल विकास को गति देने की बात हुई थी. कौशल विकास से पहले इनका सर्वे होगा और पता लगाया जायेगा कि इनका किस-किस तरह का कौशल विकास करना है.
सर्वे के काम में विकास मित्रों को लगाया गया है. विकास मित्र एक-एक टोले में जाकर महादलितों से मिलेंगे और उनसे यह जानेंगे कि उन्हें किस तरह के कौशल विकास की जरूरत है. संबंधित क्षेत्र में किस तरह के कौशल विकास की जरूरत है. सर्वे मोबाइल एप के जरिये होगा. सर्वे के लिए विकास मित्रों को ट्रेनिंग देने का काम मंगलवार से जिलों में शुरू हो गया है.
20 दिसंबर तक इनको ट्रेनिंग मिलेगी. इसके बाद सर्वे का काम शुरू होगा. श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि फरवरी तक सर्वे का काम पूरा हो जायेगा. सर्वे के बाद यह पता चलेगा कि किस क्षेत्र में किस तरह के कौशल विकास की जरूरत है. उस तरह की ट्रेनिंग उनकी मिलेगी. प्रशिक्षण के बाद उनके हुनर में और निखार आयेगा.
