पटना : कैंसर का शुरुआती दौर में इलाज हो जाये, तो महिलाएं सामान्य जीवन जी सकती हैं. 50 फीसदी महिलाएं ही समय पर इलाज के लिए पहुंचती हैं. बाकी 50% संकोच व डर से घरवालों को नहीं बताती हैं. स्तन कैंसर के इलाज को लेकर भ्रांतियां हैं. उनमें डर है कि स्तन सर्जरी कर निकाल दिया जायेगा. कैंसर के तीसरे व चौथे स्टेज में इलाज कठिन हो जाता है.
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ चिंतामणि ने कहा. ब्रेस्ट इमेजिंग सोसाइटी के छठे राष्ट्रीय अधिवेशन ब्रास कान 2018 की शुरुआत शुक्रवार को हुई. ज्ञान भवन में सेमिनार का उद्घाटन एम्स पटना के डायरेक्टर डॉ पीके सिंह व आईजीआईएमएस के डायरेक्टर डॉ एनआर विश्वास ने किया.
40 प्रतिशत महिलाओं में स्तन को बचाया जा सकता है
यूएसए से आये डॉ सुजैन हार्वे व दिल्ली एम्स के संजय थुलकर ने बताया कि स्तन कैंसर में पहले कीमोथिरेपी के जरिये ट्यूमर के आकार को छोटा किया जाता है. जिससे कैंसर युक्त ट्यूमर निकल जाता है. एक्सिला (कांख) में सेंनटेनियल ग्रंथि की बायोप्सी कर कैंसर को देखा जाता है. कैंसर होने पर ग्रंथि को निकाल दिया जाता है, ताकि दोबारा कैंसर न हो. इस तकनीक से करीब 40 फीसदी से अधिक स्तन कैंसर की महिलाओं के स्तन को बचाया जा सकता है.
स्तन कैंसर की होती हैं 4 अवस्थाएं
पटना एम्स के कैंसर रोग विशेषज्ञ व आयोजन के अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने बताया कि सेमिनार का विषय ब्रिजिंग द गैप यानी बड़े शहरों व छोटे शहरों के बीच इमेजिंग सुविधाओं के बड़े फासले को कम करना है, ताकि सभी महिलाओं को कैंसर के इलाज व जांच में परेशानी नहीं हो. डॉ प्रेम ने बताया कि डॉ ज्ञान चंद बताते हैं कि स्तन कैंसर की चार अवस्थाएं होती हैं.
पहले स्टेज में 80 फीसदी, दूसरे स्टेज में 60-70 फीसदी इलाज से ठीक हो जाती हैं. हालांकि तीसरे और चौथे स्टेज में इलाज काफी कठिन हो जाता है. स्तन कैंसर के इलाज के लिए मल्टी डिस्पलीनरी विशेषज्ञता की जरूरत होती है, जिसमें इंडो व प्लास्टिक सर्जन के अलावा रेडियोथेरेपी, हिस्टोपैथोलॉजिस्ट , रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत होती है.
पहले दिन डॉ शिल्पा लेड, डॉ विजय कुमार, डॉ प्रितांजली सिंह, डॉ सुमा चक्रवर्ती, डॉ उपासना आदि कई डॉक्टरों ने कैंसर रोग के निदान व आधुनिक जानकारी को लेकर जानकारी दी.
