पटना : बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं (कॉपी) के मूल्यांकन में कुछ समस्याएं आती हैं. इसके अलावा पुनर्मूल्यांकन (रीचेकिंग) के लिए आवेदन करनेवाले विद्यार्थियों में जल्द रिजल्ट की घोषणा को लेकर चिंता बनी रहती है. कई बार विद्यार्थी अपनी चिंता जाहिर करते देखे भी जाते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अब मूल्यांकन केंद्रों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि विद्यार्थी पहले परिणाम प्राप्त कर सकें. सूत्रों की मानें, तो समय रहते रिजल्ट आने से विद्यार्थियों को नामांकन में होनेवाली कठिनाई से निजात मिलेगी.
अधिक संख्या में प्रतिनियुक्त होंगे परीक्षक : विद्यार्थियों की कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से उत्तपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बोर्ड अधिक संख्या में परीक्षकों (शिक्षक) की प्रतिनियुक्ति करेगा. इसलिए बोर्ड ने संबद्ध स्कूलों से अपने शिक्षकों के डेटा को अपडेट करने का भी निर्देश दिया है. क्योंकि शिक्षकों की संख्या के आधार पर ही मूल्यांकन केंद्रों का निर्धारण व परीक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जायेगी.
क्या है कठिनाई
विद्यार्थियों की समस्या यह है कि परीक्षा परिणाम आने में देर होती है, तो उन्हें उच्च शिक्षा के लिए शीर्ष कॉलेजों में नामांकन कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
यहां तक कि पुनर्मूल्यांकन का परिणाम समय से प्राप्त नहीं होने के कारण कई विद्यार्थियों को नामांकन का अवसर नहीं मिल पाता है. एक स्कूल के प्राचार्य ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अधिकांश सीबीएसई स्कूलों के कई विद्यार्थियों को परीक्षा परिणामों की देरी के कारण नामांकन में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
क्योंकि देश भर के विभिन्न बोर्ड पहले परिणाम घोषित कर देते हैं और डिग्री कॉलेज व विश्वविद्यालयों में अप्रैल / मई के महीने में नामांकन प्रक्रिया आरंभ कर दी जाती है. इसलिए सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थियों को नामांकन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
