पटना : पीयू को नहीं मिल पा रहा अनुदान

नैक की मान्यता नहीं मिलने से अटके पड़े हैं कई काम रुसा के तहत मिलने वाली राशि भी रुकी पटना : नैक की मान्यता नहीं मिलने से पटना विश्वविद्यालय को यूजीसी का अनुदान बंद है. इस वजह से विवि में विकास कार्यों को धक्का लगा है. यूजीसी ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा) […]

नैक की मान्यता नहीं मिलने से अटके पड़े हैं कई काम
रुसा के तहत मिलने वाली राशि भी रुकी
पटना : नैक की मान्यता नहीं मिलने से पटना विश्वविद्यालय को यूजीसी का अनुदान बंद है. इस वजह से विवि में विकास कार्यों को धक्का लगा है. यूजीसी ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा) के तहत भी अनुदान के लिए नैक आवश्यक है. अनुदान नहीं मिलने से विवि को काफी परेशानी हो रही है.
कई छोटी-मोटी जरूरतें जो यूजीसी के फंड से पूरी हो जाती थीं अब वह भी नहीं हो पा रही है. जब सरकार से मदद नहीं मिल रही थी, तो कई भवनों का निर्माण भी यूजीसी के फंड से ही कराया जा रहा था. लेकिन, अब किसी भी काम के लिए विवि को या तो अपने आय से उसे करना पड़ता है या फिर सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है. राज्य सरकार की ओर से पहले जो अनुदान मिला करता था वह भी बंद है. यानी कुल मिला कर विवि की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होते जा रही है. अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में विवि की स्थिति और भी खराब होगी.
विवि में छात्राओं के फीस को सरकार ने माफ कर दिया. लेकिन, अब तक इन छात्राओं को माफ की गयी राशि का अनुदान नहीं मिला है. इस वजह से विवि आय सीधे आधी हो गयी है. कुछ छात्रों की राशि से जो आय होती है, उसी से विवि का खर्चा चलता है. वहीं फॉर्म बेच कर विवि को जो लाभ होता है उससे उनके दैनिक खर्च निकलते हैं.
कुल मिला कर कॉलेजों की स्थिति आर्थिक रूप से काफी दयनीय हो गयी है. कई काम तीन या चार वर्षों तक लटके रहते हैं. उसके बाद काम शुरू भी हुआ तो फिर उसमें दो-तीन वर्ष आराम से लग जाते हैं. यह स्थिति कमोवेश हर कॉलेजों की है.
इस बार पहले भेज रहे बजट
आर्थिक समस्या से निबटने और अनुदान की कमी को देखते हुए ही विवि के द्वारा इस बार सीनेट की बैठक पहले हो रही है. बजट भी पहले तैयार कर लिया गया है.
क्योंकि, विवि के पास सैलरी को छोड़कर और कोई राशि सरकार से या कहीं और से नहीं मिल रही है. इस बजट में कुछ नये-पुराने योजनाओं के लिए सरकार से राशि की मांग की जायेगी. इसके अतिरिक्त कुछ जरूरी खर्चों की भी मांग होगी. आय-व्यय का खाका दिया जायेगा. बताते चलें कि विवि में 300 से 400 करोड़ रुपये तक घाटे का बजट हर साल प्रस्तुत किया जाता है.
इस बार सीनेट में बजट समय से स्वीकृत करा कर सरकार को भेजा जायेगा. ताकि, विवि को समय पर कुछ फंड या अनुदान मिल सके. विवि की कई विकास योजनाएं पाइप लाइन में हैं. नैक को लेकर हम प्रयासरत हैं और छुट्टियों के बाद एसएसआर अपलोड कर दिया जायेगा. विवि प्रयास कर रहा है कि हमें अच्छा ग्रेड मिले. यही वजह है कि इसमें थोड़ी देरी हो रही है.
प्रो एनके झा, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीयू

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