एनसीपीसीआर की बैठक में की गयी अनुशंसा
पटना : स्कूलों में हर क्लास में बच्चों के लिए उबले हुए ठंडे पानी की व्यवस्था होनी चाहिए. इस से बच्चों को घर से पानी की बोतल लेकर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की एक बैठक में कई अनुशंसाएं की गयी है, जिसमें बस्ते का बोझ कम करने के साथ बच्चों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान रखा गया है. आयोग की ओर से कहा गया है कि क्लास में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था होगी, तो उसे ढोने की समस्या समाप्त हो जायेगी.
अभिभावकों के लिए हैंडबुक : इसके अलावा आयोग ने अभिभावकों को उनके बच्चों के लिए एक हैंडबुक विकसित करने पर भी बल दिया है. बताया गया है कि हैंडबुक में बस्ते के वजन के अलावा स्वास्थ्य के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए.
उसमें बच्चे की प्रगति, संपूर्ण विकास, अभिभावकों व समाज का सहयोग, बच्चों के तनाव व थकान में कमी लाना, पढ़ाई के लिए माध्यम के तौर पर मातृभाषा के उपयोग की आवश्यकता, प्रत्येक बच्चे के लिए होम कैरिकुलम की अवधारणा, स्कूल और घर-दोनों जगह पढ़ाई का खुशनुमा माहौल, दंड और पुरस्कार, प्रतिरक्षण कार्यक्रम, संतुलित आहार, शारीरिक मजबूती के उपाय, प्रतिपूरक और पूरक विटामिन व आयरन की गोलियां आदि शामिल हो.
छोटे बच्चों पर असाइनमेंट का दबाव न बने : एनसीपीसीआर की ओर से कहा गया है कि स्कूल-पूर्व (प्री-स्कूल) कक्षाओं के छोटे बच्चों को खाली हाथ स्कूल भेजा जाना चाहिए. उनकी पीठ पर कोई बोझ नहीं होना चाहिए.
पठन-पाठन की सभी सामग्री जिसमें रंग, चित्रकला, मॉडल बनाने इत्यादि की सामग्री भी शामिल होती है. गृहकला और असाइनमेंट करने के लिए उन पर कभी भी कोई दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए.
