मूल रूप से शंभू-मंटू गिरोह से जुड़ा था
इसके खिलाफ फायरिंग, रंगदारी व हत्या के कई मामले दर्ज हैं
पटना : मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार की हत्या के मामले में सुजीत कुमार व गोविंद कुमार का नाम सामने आ रहा है. गोविंद मुजफ्फुरपुर के साथ ही पटना के लिए भी पुराना नाम है. यह मूल रूप से शंभू-मंटू गिरोह से जुड़ा था.
सीपीडब्ल्यूडी में टेंडर को लेकर होने वाली भिड़ंत को शंभू-मंटू के लिए गोविंद ही सभी निर्णय लेता था. वर्ष 2013 सीपीडब्लूडी में टेंडर को लेकर होने वाली भिड़ंत की सूचना पर एसएसपी मनु महाराज ने इलाके की घेराबंदी करायी थी और मौके से शंभू-मंटू गिरोह के कई सदस्यों की गिरफ्तारी की गयी थी. इसमें गोविंद भी शामिल था. इन लोगों के पास से हथियार भी बरामद किया गया था. राजीव नगर थाने में भी आर्म्स एक्ट का मामला उसके खिलाफ दर्ज पूर्व से दर्ज है.
इसके अलावा मुजफ्फरपुर में टेंडर वार को लेकर इसके खिलाफ फायरिंग, रंगदारी व हत्या के कई मामले दर्ज हैं. मंटू की गिरफ्तारी पटना पुलिस ने लखनऊ से मई 2016 में की थी. इसके बाद जून में शंभू ने एसएसपी मनु महाराज के सामने सरेंडर कर दिया था. सरेंडर करने के बाद गिरोह में फूट पड़ गयी थी. इसके बाद गोविंद ने अपना गिरोह बना लिया. इसके गिरोह में शंभू व मंटू गिरोह के अधिकतर सदस्य शामिल हो गये थे.
मुजफ्फरपुर पुलिस पहुंची पटना : सूत्रों का कहना है कि गोविंद का पटना में शुरू से ही कनेक्शन रहा है. जिसके कारण पटना के अपराधियों में भी उसकी अच्छी पकड़ है. सीपीडब्ल्यूडी के टेंडरवार में वह पटना के ही अपराधियों को भाड़े पर इस्तेमाल करता था. सूत्रों का कहना है कि मुजफ्फरपुर पुलिस की एक टीम पटना आ कर गाेविंद के संबंध में जानकारी जुटाने में लगी है.
गोविंद की गिरफ्तारी शास्त्रीनगर थाने से हुई थी और उसके संबंध में काफी जानकारी व फोटोग्राफ पटना के थानों में पूर्व से है. इसके साथ ही यह भी पुलिस संभावना जुटा रही है कि वह हत्या करने के बाद पटना में आ कर शरण ले सकता है. हालांकि मुजफ्फरपुर पुलिस के पटना में होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
शंभू-मंटू के पूर्व के ठिकानों से वाकिफ है गोविंद
गोविंद पूर्व में शंभू-मंटू के लिए काम कर चुका है. अभी वह उन लोगों के लिए काम कर रहा है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है. लेकिन वह उन दोनों के छूपने के तमाम ठिकानों को जानता है. मंटू को पुलिस ने पकड़ लिया था, लेकिन शंभू फरार रहा. अंत में उसने अपने मन से एसएसपी मनु महाराज के समक्ष सरेंडर किया था. गोविंद शंभू के स्टाईल में ही छूपने के ठिकानों का इस्तेमाल कर सकता है.
