पटना : 16 जुलाई से पहले आंधी में तबाह हुई फसलों के लिए कृषि इनपुट अनुदान नहीं दिया जायेगा. फसल क्षति और उसके मुआवजा को लेकर पेच फंस गया है. किसानों को मुआवजा भारतीय मौसम विज्ञान की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा. पूर्व केंद्रीय मंत्री डाॅ रघुवंश प्रसाद की आरटीआई के जवाब में कृषि पदाधिकारी ने जाे जानकारी दी है उसके अनुसार फसल क्षति मुआवजा मिलना अभी दूर की कौड़ी है. डाॅ रघुवंश प्रसाद ने आरटीआई में पूछा था कि 27 अप्रेल को पारू और सरैया प्रखंड में कितने गांव में कितने किसानों की कितनी फसल बर्बाद हुई. उनको फसल क्षति का मुआवजा कितना और कब तक मिलेगा.
जिला कृषि पदाधिकारी मुजफ्फरपुर ने इस संबंध में जो जानकारी दी उससे पूरे प्रदेश की स्थिति लगभग साफ हो रही है. कृषि पदाधिकारी ने बताया है कि पारू और सरैया प्रखंड में क्षति को लेकर कृषि निदेशक बिहार को पत्र भेजा था. सिंचित के लिए 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर एवं असिंचित फसलों के लिए 6800 रुपये तथा बहुवर्षीय फसलों के लिए 18000 रुपये प्रति हेक्टेयर फसल क्षति का प्रावधान है.
अपर सचिव अापदा प्रबंधन विभाग ने 25 जुलाई को पत्र जारी कर कृषि विभाग को सूचित किया कि 16 जुलाई के पूर्व आंधी से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए कृषि इनपुट अनुदान अनुमान्य नहीं है. इस अनुदान की अनुमान्यता भारतीय मौसम विज्ञान के प्रतिवेदन पर आधारित है.
