प्राइवेसी के लिहाज से केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने उठाया कदम
पटना : राजनीतिक दलों को दी जाने वाली मतदाता सूची में मतदाताओं की तस्वीर नहीं होगी. प्राइवेसी के लिहाज से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को देखते हुए केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने यह व्यवस्था की है. आयोग के प्रधान सचिव नरेंद्र एन बुटोलिया ने इस संबंध में सभी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को पत्र लिख कर इसका पालन करने का निर्देश दिया है.
गैर मान्यताप्राप्त दल व एनजीओ को देने होंगे पैसे : आयोग ने कहा कि मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों को ड्राफ्ट व फाइनल मतदाता सूची की दो-दो सॉफ्ट कॉपियां नि:शुल्क उपलब्ध करायी जायेगी. गैर मान्यताप्राप्त दल, एनजीओ व सामान्य नागरिक 100 रुपये देकर सीडी में मतदाता सूची ले सकेंगे.
आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि चुनावी प्रोफाइलिंग के लिए फोटोयुक्त मतदाता सूची के दुरुपयोग की संभावना है. साथ ही इससे मतदाता की गोपनीयता का संकट हो सकता है. ऐसी स्थिति में बगैर तस्वीर वाली मतदाता सूची ही राजनीतिक दलों को दी जायेगी.
मान्यताप्राप्त राजनीतिक दल को नि:शुल्क मिलेंगी मतदाता सूची की दो सॉफ्ट कॉपियां
फोटोयुक्त मतदाता सूची का इस्तेमाल सिर्फ मतदान के दिन किया जायेगा. केंद्रों पर मतदान कराने वाले पोलिंग अफसरों को फोटोयुक्त मतदाता सूची ही उपलब्ध करायी जायेगी, ताकि वे मतदाता की तस्वीर का मिलान कर सही मतदाता को उनके मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दे सकें. पोलिंग अफसर के पास फोटोयुक्त मतदाता सूची की उपलब्धता से मतदाताओं की गोपनीयता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
वेबसाइट पर भी नहीं दिखेगी तस्वीर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध करायी गयी पीडीएफ मतदाता सूची में भी मतदाताओं की तस्वीर नहीं रहेगी. आयोग के मुताबिक सूची में हर मतदाता के डिटेल के बगल में बने बॉक्स से यह क्लियर होगा कि उस मतदाता की तस्वीर सूची में है या नहीं.
हालांकि, बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 100 फीसदी फोटोयुक्त मतदाता सूची और 100 फीसदी मतदाताओं के पास फोटो पहचान पत्र (ईपिक) होने का दावा किया है. आयोग ने वेबसाइट पर पीडीएफ मतदाता सूची देखने के लिए ‘ कैप्चा ‘ का प्रावधान अनिवार्य कर रखा है.
