दारोगा बहाली के अंतिम परिणाम पर रोक हटाने से पटना हाईकोर्ट का इनकार, 18 सितंबर को होगी अंतिम बहस

पटना : दारोगा बहाली का अंतिम परिणाम जारी करने पर लगाये गये रोक को हटाने से पटना हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए गुरुवार को अदालत ने कहा कि दारोगा बहाली के अंतिम परिणाम पर रोक जारी रहेगी. वहीं, अदालत ने कहा कि 18 सितंबर को फाइनल बहस के बाद […]

By Prabhat Khabar Print Desk | September 13, 2018 1:37 PM

पटना : दारोगा बहाली का अंतिम परिणाम जारी करने पर लगाये गये रोक को हटाने से पटना हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए गुरुवार को अदालत ने कहा कि दारोगा बहाली के अंतिम परिणाम पर रोक जारी रहेगी. वहीं, अदालत ने कहा कि 18 सितंबर को फाइनल बहस के बाद फैसला सुनायी जायेगी. मालूम हो कि 1717 पदों के लिए पांच अगस्त को मुख्य लिखित परीक्षा का परिणाम जारी किया गया था. इसमें 10161 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था. अब 10161 सफल अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा पास करनी थी. हालांकि, अंतिम चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाना था.

जानकारी के मुताबिक, बिहार में दारोगा बहाली के अंतिम परिणाम पर पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि रोक जारी रहेगी. न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय की एकल पीठ में गुरुवार को मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सरकारी वकील के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर अदालत ने कहा कि दारोगा बहाली के अंतिम परिणाम पर रोक जारी रहेगी. वहीं, याचिकाकर्ता के वकील प्रभात भारद्वाज के मुताबिक, सरकारी वकील द्वारा काउंटर एफेडेविट में गोलमटोल जवाब और प्रक्रिया का हवाला देते हुए कुछ भी सार्वजनिक करने से इनकार किया है. सरकारी वकील के इस रुख को देखते हुए अदालत ने एतराज जताया और अंतिम परिणाम जारी करने पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया. साथ ही अदालत ने विस्तृत काउंटर एफेडेविट दाखिल करने का आदेश दिया. साथ ही अदालत ने कहा कि अब 18 सितंबर को फाइनल बहस होगी.

क्या है मामला

रमेश कुमार एवं अन्य 195 अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में अनियमितता और गड़बडी का आरोप लगाते हुए पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चक्रपाणी और राजेश भारद्वाज ने अदालत को बताया है कि प्रारंभिक और मुख्य लिखित परीक्षा के परिणाम घोषित करने से पहले आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है. प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के परिणाम में काफी गड़बड़ी की गयी है. प्रारंभिक परीक्षा में पिछड़ी जाति महिला वर्ग से एक भी अभ्यर्थी पास नहीं हुई थी, लेकिन जब मुख्य परीक्षा का परिणाम आया, तो उसमें पिछड़ी जाति की 291 महिला अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे. इतना ही नहीं, प्रारंभिक परीक्षा में अति पिछड़ा वर्ग की 222 महिलाएं पास थीं, लेकिन मुख्य परीक्षा में 222 की जगह 616 महिलाओं को अति पिछड़ा वर्ग से पास दिखाया गया है.

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया कि परीक्षा परिणाम को देखने के बाद पता चला कि किसी-किसी परीक्षा केंद्र से एक भी अभ्यर्थी पास नहीं हुआ और किसी-किसी परीक्षा केंद्र से सभी अभ्यर्थी पास किये गये हैं. अधिवक्ता चक्रपाणी ने अदालत को बताया कि आयोग ने ना तो कैटेगरी के अनुसार कटऑफ लिस्ट जारी की है और न ही मॉडल आंसरशीट ही जारी की है. इतना ही नहीं, जब अभ्यर्थियों ने आरटीआई के तहत इस संबंध में आयोग से जवाब मांगा, तो आयोग ने यह कहते हुए इसका जवाब नहीं दिया कि अंतिम रिजल्ट प्रकाशन के बाद ही किसी तरह का जवाब दिया जायेगा.

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