पटना सिटी : वैष्णव जन को तेने कहिए , पीड़ परायी जाने ना, पायो जी मैंने राम रतन धन पायो आदि भजनों तान पतित पावन गंगा के तट पर जब पापिया गांगुली व चक्रबर्ती कुमार सिंह ने छेड़ी तब उपस्थित लोगों की आंखें डबडबायी गयीं. मौका था पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश को भद्र घाट पर गंगा में प्रवाहित करने व सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा का. आयोजित सभा में भाजपा कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के संयोजक वरुण कुमार सिंह की अगुआई में कलाकारों ने निर्गुण भजनों की प्रस्तुति दी.
तबला पर अलाउद्दीन, गौरव व विनोद कुशवाहा वाद्य यंत्र पर प्रस्तुति दे रहे थे. इसी बीच रथ पर अस्थि कलश लेकर पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, महापौर सीता साहु, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, नितिन नवीन, संजीव चौरसिया, पूर्व उपमहापौर रूप नारायण मेहता व महामंत्री विनय केसरी व संजीव यादव समेत अन्य पहुंचते हैं. इसके बाद आरंभ होती श्रद्धांजलि सभा, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय व संचालन धनंजय मेहता करते हैं.
अटल जी निर्भीक राजनेता थे : सभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व ऐसा था कि 2004 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद 14 वर्षों तक पद से दूर रहने के बाद जब उनका निधन हुआ, तो लाखों लोग सड़क पर श्रद्धांजलि देने निकल आये.
ऐसा उनका व्यक्तित्व था. उपमुख्यमंत्री ने अटल जी के परमाणु परीक्षण व अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंध की चर्चा करते हुए कहा कि 11 मई को भारत द्वारा परमाणु परीक्षण करने के अगले दिन 12 मई को अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया.
इसके बाद भी फिर 13 मई को अटल जी ने दोबारा परमाणु परीक्षण कराया. वे निर्भीक राजनेता थे. पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा कि अटल जी पटना साहिब में 1991 में अंतिम बार आये थे, जब मंगल तालाब पर सभा होनी थी, उस समय मैंने सबसे लंबा लगभग पौन घंटे का भाषण दिया था. आज जो कुछ भी हूं, उनकी प्रेरणा से हूं.
वे हमेशा मार्गदर्शन करते थे. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय के बाद अटल जी का दूसरा अध्याय होगा. अटल जी हमेशा सीमा सुरक्षित, समाज सबल व परिवार सुखी का संकल्प लेकर कार्य करते थे. उनकी अस्थि कलशयात्रा में लोग भावुक व पवित्र मन से जुड़े हैं.
मार्ग में थी श्रद्धांजलि देनेवालों की भीड़ : राजा बाजार के संस्कृत विद्यापीठ से निकल कर अस्थि कलशयात्रा पटना के विभिन्न मार्गों होते हुए पहाड़ी पहुंची.
इसके बाद वहां से पैजाबा, सती चौड़ा व महादेव स्थान होते हुए चौकशिकारपुर उपरि सेतु के रास्ते अशोक राजपथ चौक पहुंची. जहां से पश्चिम दरवाजा होते हुए भद्र घाट पहुंची. रास्ते में खड़े लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की. बौली मोड़ पर शिविर में लोगों ने श्रद्धांजलि दी.
