पटना : पटना विवि समेत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीजी स्नातकोत्तर में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) इसी सत्र से लागू कर दिया गया है. पीयू ने इसे पहले लागू किया है. इसके तहत हर छात्र को अपने संबंधित विषय से अलग दो पेपर इलेक्ट करने का ऑप्शन होगा. एक जेनरल ऑप्शन होगा, जिसमें दस अलग-अलग विषयों के पेपर शामिल होंगे.
जिसमें छात्रों का चुनना होगा. जैसे स्किल डेवलपमेंट, इनोवेटिव टेकनिक्स, सॉफ्टवेयर आदि. वहीं, दूसरा पेपर उसी फैकल्टी (डिसिप्लिन) का होगा, जो उसके स्नातकोत्तर विषय का फैकल्टी होगा. जैसे अगर छात्र मानविकी के हिंदी विषय से पीजी कर रहा है तो मानविकी संकाय के ही किसी दूसरे विषय अंग्रेजी, संस्कृत, मैथिली आदि कोई भी विषय को इलेक्टिव पेपर के रूप में चुना जा सकता है. इसी तरह अगर वह साइंस संकाय का है और फिजिक्स से पीजी कर रहा है, तो वह केमिस्ट्री, मैथ, बॉयोलोजी आदि में से किसी भी विषय को एक पेपर के रूप में इलेक्टिव चुन सकता है.
सारे विश्वविद्यालयों में एक सिलेबस
सीबीसीएस के तहत सारे विश्वविद्यालयों में अब सिलेबस का फॉर्मेट, कोर्स रेगुलेशन अब एक ही है. एक जैसा सिलेबस होने से अलग-अलग सिलेबस के झंझट से छात्राओं को मुक्ति मिलेगी. यह यूजीसी के मानकों पर आधारित है. राष्ट्रीय स्तर पर पीजी के सिलेबस से यह काफी समीप है. हर सेमेस्टर में कुछ ऐसे पेपर को लागू किया गया है, जो सभी पीजी के छात्रों को पढ़ना अनिवार्य है. एक पेपर 50 क्रेडिट का होगा. मार्किंग सिस्टम पहले की तरह ही है. 45 प्रतिशत अंक पास होने के लिए चाहिए, लेकिन इसे क्रेडिट के फॉर्मेट में भी दिया जायेगा. पहले की तरह ही परीक्षा के लिए 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य होगा.
छात्रों और शिक्षकों में अब भी कंफ्यूजन
सीबीसीएस के तहत सिलेबस से लेकर मार्किंग सिस्टम व कई अन्य नियमों में कई तरह के बदलाव किये गये हैं. इसको लेकर विश्वविद्यालय की ओर से वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया था. लेकिन, अभी भी कुछ विभागाध्यक्ष, शिक्षक व छात्र इसको बेहतर ढंग से समझ नहीं सके हैं. छात्रों में तो कंफ्यूजन है ही, कई शिक्षक भी नहीं समझ पा रहे हैं. सबका यही कहना है कि यह अभी लागू हुआ है और एक सत्र के बाद ही या एक-दो सेमेस्टर बाद ही यह कुछ अच्छे से समझ में आयेगा.
सीबीसीएस को लेकर स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है. इसको लेकर 4-5 वर्कशॉप भी विवि में हो चुके हैं. इसमें नहीं समझने जैसी कोई बात नहीं है. पहली दफा कोई चीज जब लागू होती है, तो उसे एडप्ट करने में थोड़ी दिक्कत जरूर होती है. लेकिन, जल्द ही पहले की तरह यह कॉमन हो जायेगा. सिलेबस में कुछ अंतर किया गया है, लेकिन कोई बहुत बड़ा फेरबदल नहीं है. क्रेडिट सिस्टम के तहत कुछ बदलाव किये गये हैं उसमें कहीं से कोई दिक्कत नहीं है. पीयू इसके लिए कैपेबल है और छात्र भी इसे आसानी से टेकअप कर लेंगे.
प्रो एनके झा, स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन, पीयू
स्नातक में अगले साल से लागू होगा सीबीसीएस
इस वर्ष स्नातक में सीबीसीएस लागू नहीं किया जा सका. इसे अगले सत्र से लागू किया जायेगा. मिली जानकारी के अनुसार जिस प्रकार से सीबीसीएस का रेगुलेशन राजभवन की ओर से ही बनाया गया, उसी तरह से स्नातक का भी राजभवन ही बनायेगी.
