समस्या. जाम ने लोगों की परेशानी ही नहीं बढ़ायी, ईंधन खर्च और प्रदूषण भी बेहद बढ़ा दिया
पटना : जाम राजधानीवासियों के लिए दिन-ब-दिन बड़ी समस्या बनते जा रही है. पीक आवर में स्थिति इतनी दयनीय हो जाती है कि छह लेन वाली बेली रोड पर 12 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी वाहन नहीं दौड़ पा रहेे हैं. इसने न केवल लोगों की परेशानी बढ़ायी है बल्कि पेट्रोल और डीजल पर होने वाला खर्च भी बेहद बढ़ा दिया है. ट्रैफिक लाइट्स के ग्रीन होने के इंतजार में लंबे कतार में खड़े वाहनों का इंजन बेवजह लंबे समय तक ऑन रहता है और उससे धुआं निकलते रहता है. यही स्थिति जाम में फंसे वाहनों की भी होती है, जिनका इंजन लगातार चालू रहता है और प्रदूषण फैलाता रहता है. इससे पटना का पर्यावरण प्रदूषण भी दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहा है.
चारपहिया वाहनों की रफ्तार चार से आठ किमी प्रति घंटा : समस्या की गंभीरता को दिखाने के लिए प्रभात खबर की टीम ने राजधानी की पांच प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक की रफ्तार का पीक और स्लैग आवर में पड़ताल किया.
टीम यह देख कर हैरान रह गयी कि पीक आवर में शहर की सबसे चौड़ी और प्रतिष्ठित मानी जानेवाली सड़कों पर भी चारपहिया वाहनों की रफ्तार केवल चार से आठ किमी प्रति घंटे के बीच है. फ्रेजर रोड और एक्जीबिशन रोड में इसकी प्रमुख वजह डाकबंगला चौराहा और एक्जीबिशन रोड चौराहा की ट्रैफिक लाइट थी, जहां दो मिनट के वेटिंग टाइम में ही इतने अधिक वाहन पहुंच जाते हैं कि उनकी बहुत लंबी कतार लग जाती है.
इसके कारण चारपहिया वाहनों को केवल ट्रैफिक लाइट पार करने के लिए दो बार सिग्नल के ग्रीन होने का इंतजार करना पड़ता था. बेली रोड में धीमी ट्रैफिक की वजह ट्रैफिक सिग्नल पर लगनेवाला जाम के साथ-साथ जेडी वीमेंस जगदेवपथ फ्लाइओवर के निर्माण के कारण राजा बाजार में सड़क की चाैड़ाई का घटना और लोहिया पथ चक्र के निर्माण के कारण ललित भवन के पास ट्रैफिक परिचालन में आ रही बाधा भी दिखी.
प्रभात खबर की टीम ने बाइक की गति का अलग से पड़ताल किया. बाइक की रफ्तार चारपहिया वाहनों की तुलना में थोड़ी अधिक थी. लेकिन, यह भी छह से 11 किमी प्रति घंटे के भीतर ही सिमटी दिखी. इसके कारण छोटी दूरियों को तय करने में समय अधिक लगा.
