साजिश के तहत निर्वाचन रद्द करने का लगाया आरोप
पटना : पीयू की नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष योशिता पटवर्धन के निर्वाचन रद्द किये जाने के बाद योशिता राजभवन जाने की तैयारी में है. सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योषिता ने कहा कि पूरी प्रक्रिया ने सभी को भ्रमित कर दिया है. मुझे सात फरवरी को नामांकन के लिए बुलाया गया.
लेकिन, संगठन के लोगों द्वारा यह बताया गया कि प्रोमोटेड चुनाव नहीं लड़ सकती, मैं घर वापस आ गयी. फिर सात फरवरी की शाम को कार्यालय में बुलाया गया और बताया गया की विवि के कुलपति तथा छात्र कल्याण पदाधिकारी से बात हो गयी है. उन लोगों ने कहा है कि प्रोमोटेड चुनाव लड़ सकती है. उसी आधार पर नामांकन पत्र दाखिल की. स्क्रूटनी कमेटी ने नामांकन को सही ठहराया और मुझे प्रत्याशी घोषित किया गया.
परिणाम की घोषणा के चार दिन के बाद पीयू प्रशासन को लगा मैंने गलत तरीके से चुनाव लड़ा. जल्दबाजी में कुलपति ने 13 मार्च को मेरा चुनाव रद्द कर दिया. एक ही ऑर्डर में उन्होंने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष का चुनाव रद्द कर दिया. ठीक इसी तरह के मामले में संयुक्त सचिव को बरी कर दिया गया. अप्रैल में उच्च न्यायालय के आदेश से कुलपति का आदेश 13 मार्च को अवैध घोषित हो गये, जिसके तहत संयुक्त सचिव को निर्दोष साबित किया गया था. जब यह जांच प्रक्रिया नये सिरे से शुरू की गयी, तो अन्य पदों के आरोपित की जांच क्यों नहीं की गयी? किन परिस्थितियों में अन्य को छोड़कर केवल उपाध्यक्ष की जांच करायी गयी?
ग्रीवांस रिड्रेसल सेल को परिणाम की घोषणा के तीन सप्ताह तक ही कोई भी शिकायत स्वीकार करने का अधिकार परिनियम में दिया गया है. किन परिस्थितियों में ग्रीवांस रिड्रेसल सेल ने समयावधि के समाप्त होने के बाद भी शिकायत को स्वीकार किया. सिर्फ उपाध्यक्ष पद का. गलत उद्देश्य से, दबाव में, राजनीतिक साजिश के तहत चुनाव को रद्द किया गया.
