कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष बोले, जरूरी नहीं राजद के हर विरोध का हम समर्थन करें
पटना : नेता विरोधी दल तेजस्वी प्रसाद यादव राज्य में बढ़ते अपराध के विरोध में साइकिल मार्च निकालने जा रहे हैं. लेकिन, इस मार्च की सफलता राजद के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. महागठबंधन के सभी घटक दलों के इसमें शामिल होने पर अभी संशय बना हुआ है. इधर, भाजपा और जदयू इस मार्च को लेकर चौकन्ना हैं. इस मार्च को महागठबंधन की वास्तविक एकता के पैमाने के रूप में देखा जा रहा है.
तेजस्वी प्रसाद यादव ने 26 जून को अपने आवास पर आयोजित प्रेस काॅन्फ्रेंस में साइकिल मार्च की घोषणा की थी. बड़े जोश के साथ बताया था कि कानून व्यवस्था के मुद्दे पर साइकिल मार्च में महागठबंधन के सभी घटक दल ही नहीं सपा, बसपा, एनसीपी सहित सभी गैर एनडीए दलों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है. इस घोषणा के पांच दिन बाद भी राजद के किसी भी सहयोगी दल ने इस मार्च में शामिल होने की घोषणा नहीं की है. बिहार में महागठबंधन के प्रमुख दल कांग्रेस ने संकेतों में यह बता दिया है कि वह साइकिल मार्च में शायद की भाग लेगी.
राज्य के मुद्दे पर पार्टी का अपना नजरिया : कौकब
कांग्रेस के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी ने प्रभात खबर को बताया कि कांग्रेस राष्ट्रीय मुद्दे पर तो राजद केसाथ है, लेकिन राज्य के मुद्दे पर पार्टी का अपना नजरिया है. कांग्रेस का राजद के साथ गठबंधन जरूर है, लेकिन यह जरूरी तो नहीं कि जदयू का राजद जिस-जिस मुद्दे को लेकर विरोध करे उसका कांग्रेस भी विरोध करे.
राजद के पहली पंक्ति के कितने नेता कितनी दूर तक साइकिल चलायेंगे इसको लेकर भी अटकल लगायी जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का महागठबंधन के सभी दलों से एकता बनाये रखने की अपील भी यह संकेत दे रहा है कि एकता में कहीं कुछ कमी है.
