गहनों की हॉलमार्किंग के लिए करना होगा और इंतजार

हॉलमार्किंग की अनिवार्यता को लेकर कानून को एक जुलाई से लागू कराना संभव नहीं पटना : केंद्र सरकार ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने की घोषणा की थी. लेकिन एक जुलाई से देश भर में हॉलमार्किंग की अनिवार्यता को लेकर संशय की स्थिति बनीहुई. भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अधिकारी की मानें […]

हॉलमार्किंग की अनिवार्यता को लेकर कानून को एक जुलाई से लागू कराना संभव नहीं
पटना : केंद्र सरकार ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने की घोषणा की थी. लेकिन एक जुलाई से देश भर में हॉलमार्किंग की अनिवार्यता को लेकर संशय की स्थिति बनीहुई. भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अधिकारी की मानें तो एक जुलाई से इस कानून को लागू करानासंभव नहीं दिख रही है, क्योंकि हॉलमार्किंग के नये ड्राफ्ट रेगुलेशन 14 जून 2018 को बीआईएस द्वारा नोटिफिकेशन की गयी है. लेकिन इसकी अनिवार्यता के लिए इसकी नोटिफिकेशन होना अभी भी बाकी है. सरकार ने आभूषणों की स्वैच्छिक हॉलमार्किंग स्कीम 2001 में शुरूकी थी.
सूत्रों के मुताबिक सोने के आभूषणों पर हाॅलमार्किंग की अनिवार्यता का क्रियान्वयन दो चरणों में होगा. पहले चरण में बड़े शहरों के ज्वेलर्स को सोने के आभूषणों पर हाॅलमार्किंग सुनिश्चित करने के लिए छह माह का समय दिया जायेगा. छोटे शहरों,कस्बों तथा दूर-दराज इलाकों में हाॅलमार्किंग की अनिवार्यता के लिए एक साल का समय दिया जायेगा. कानून मंत्रालय ने सभी तकनीकी पहलुओं पर गौर करने के बाद इन्हें मंजूरी प्रदान की है.
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की पहले से ही पूरी तैयारी कर लें
सरकार ने 14, 18 व 22 कैरेट के आभूषणों पर हाॅलमार्किंग की मंजूरी दी है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है. पाटलिपुत्र सर्राफा संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि हॉलमार्किंग की अनिवार्यता संसद द्वारा पारित हो चुकी है. अनिवार्यता के नोटिफिकेशन के बाद सभी ज्वेलर्स को सोना के आभूषण हॉलमार्क ही रखनी और बिक्री करनी होगी. ऐसे में ज्वेलर्स को हॉलमार्किंग की रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले से ही पूरी तैयारी कर लेनी चाहिए.
शुल्क टर्न ओवर पर
नये रजिस्ट्रेशन के नोटिफिकेशन के बाद फीस में बदलाव हुए है. पहले यह शुल्क 25,000 रुपये के अलावा आवेदन शुल्क और कुल जोड़ पर 18 फीसदी जीएसटी था, जो लगभग 32,000 रुपये तीन साल का होता था. लेकिन अब ये शुल्क टर्न ओवर पर कर दिया गया है और पांच करोड़ तक की सीमा के अंदर 11,210 रुपये जीएसटी सहित पांच वर्षों के लिए कर दिया गया है.
सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद ही सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क की अनिवार्यता हो जायेगी. कानून बन जाने के बाद बिना रजिस्ट्रेशन कोई ज्वेलर्स हॉलमार्क ज्वेलरी न तो बेच सकेगा और न ही अपने दुकान के बोर्ड पर लिख सकेगा कि यहां हॉलमार्क के गहने बिकते हैं. अगर ऐसा करता पकड़ा जायेगा तो जेल तक की सजा हो सकती है.
केसी विष्ट, प्रमुख, भारतीय मानक ब्यूरो, पटना

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