पटना : अगर आपकी नियोक्ता कंपनी ने अभी तक फॉर्म 16 नहीं दिया गया है और आप आयकर रिटर्न फाइल करने को लेकर परेशान हैं तो चिंता की कोई बात नहीं है.
इस बार समय से रिटर्न नहीं भरने वालों को लेट फी के रूप में 10 हजार रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं. फार्म 16 के बिना कैसे इनकम टैक्स फाइल करें. इस संबंध में वरीय चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश कुमार खेतान से इस संबंध में विस्तार से बातचीत हुई. प्रस्तुत है यह रिपोर्ट.
जरूरी कागजात को जमा कर लें : अगर आपका बिजनेस ऑडिट के दायरे में नहीं है और न ही आप किसी कंपनी का रिटर्न दाखिल कर रहे हैं.
आप अपने सभी जरूरी कागजात एक जगह जमा कर लें. जैसे आपकी सैलरी स्लिप, बैंक खाते का विवरण, हर प्रकार की आय का ब्योरा, किये गये इन्वेस्टमेंट की डिटेल, फॉर्म 16 ए इत्यादि. फॉर्म 16 नहीं आने की वजह से आम लोग अपना रिटर्न नहीं दाखिल कर पाते हैं, लेकिन इस साल से सभी रिटर्न को तय समय सीमा के अंदर दाखिल नहीं करने से आप को भारी भरकम लेट फी चुकानी पड़ेगी.
फॉर्म डाउनलोड करें : आप सबसे
पहले टीडीएससीपीएस की वेबसाइट
पर जा कर अपना फॉर्म 26 एएस डाउन लोड कर लें. इस फार्म में आपके नियोक्ता द्वारा काटे गये टीडीएस के साथ ही, बैंकों द्वारा दिये गये ब्याज पर भी यदि कोइ टीडीएस काटा गया हो तो उसका ब्यौरा मौजूद रहता है. इसके आधार पर आप अपना आय कर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.
रिटर्न प्रोसेस होने के पहले रिटर्न दाखिल अगर आपका टीडीएस उपरोक्त फॉर्म नहीं दिखाई दे रहा है. तो आप सैलरी स्लिप के आधार पर अपने आय की गणना कर सकते हैं. नियोक्ता के द्वारा काटे गये टीडीएस का क्लेम ले सकते हैं. हो सकता है कि नियोक्ता ने अभी टीडीएस रिटर्न दाखिल ही नहीं किया हो और वह आपका रिटर्न प्रोसेस होने के पहले रिटर्न दाखिल कर दे.
शिकायत भी कर सकते हैं
आप पंजीकृत डाक से अपने नियोक्ता को फॉर्म -16 जारी करने का अनुरोध कर सकते हैं और इसकी रसीद अपने रिकॉर्ड के लिए रख सकते हैं.
यदि उसके बाद भी यदि आपका टीडीएस क्लेम आयकर विभाग द्वारा नहीं माना जा रहा है तो आपको अपने नियोक्ता से इस संबंध में बताना होगा कि आय कर की धारा 272 ए(2)जी के तहत उन्हें डिफाल्ट के लिए 100 रुपये प्रतिदिन जुर्माना देना पड़ सकता है. आप इस संबंध में अपने नियोक्ता की शिकायत संबंधित आय कर अधिकारी से कर सकते हैं. यदि आपके नियोक्ता ने टीडीएस जमा नहीं किया है, तो दोषी पाये जाने जाने पर जुर्माने के साथ जेल की सजा का प्रावधान हैं.
