छह भाइयों की लाडली थीं लालू प्रसाद की दीदी गंगोत्री देवी, छोटे भाई की रिहाई के लिए रोज लगाती थीं भगवान से गुहार

पटना : चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिये राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा साढ़े तीन साल की सजा और दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाये जाने का सदमा उनकी इकलौती बीमार बहन बरदाश्त नहीं कर पायीं. शनिवार की रात ही करीब 11:30 बजे ही छह भाइयों की 77 […]

पटना : चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिये राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा साढ़े तीन साल की सजा और दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाये जाने का सदमा उनकी इकलौती बीमार बहन बरदाश्त नहीं कर पायीं. शनिवार की रात ही करीब 11:30 बजे ही छह भाइयों की 77 वर्षीया इकलौती बहन गंगोत्री देवी दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गयी. परिजनों के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव से बड़ी होने के कारण गंगोत्री देवी को वे काफी सम्मान देते थे. गंगोत्री देवी से छोटे केवल दो भाई लालू प्रसाद और शुकदेव यादव हैं. इसलिए छोटे भाई के प्रति उनका स्नेह भी ज्यादा था.

जानकारी के मुताबिक, गंगोत्री देवी अपने छह भाइयों की इकलौती लाडली बहन थी. गंगोत्री देवी से बड़े मंगरु यादव, गुलाब यादव, मुकुंद यादव और महावीर यादव थे. वहीं, उनसे छोटे लालू प्रसाद यादव और शुकदेव यादव थे. परिजन बताते हैं कि लालू प्रसाद की रिहाई के लिए वह रोज भगवान से गुहार लगाती थीं.

गंगोत्री देवी की शादी पंचदेवरी प्रखंड स्थित चकरपान में जगधारी चौधरी से हुई थी. वर्ष 2010 में उनके पति की मौत हो जाने के बाद वह कभी चकरपान में रहती थीं, तो कभी पटना आ जाती थी. गंगोत्री देवी के पौत्र संजय यादव के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से गंगोत्री देवी पटना में ही रह रही थीं. उनके साथ बेटे रुदल यादव व बैरिस्टर यादव तथा बेटी उर्मिला देवी रहते थे. पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में उनका इलाज चल रहा था. गंगोत्री देवी की पटना में हुई मौत की खबर मिलते ही उनकी ससुराल चकरपान और मायके फुलवरिया में कोहराम-सा मच गया.

गांव के लोग बताया कि गंगोत्री देवी प्रेम व सादगी की प्रतीक थीं. उन्होंने हमेशा एक कुशल गृहिणी का फर्ज निभाया. पति जगधारी चौधरी की मौत के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली. गंगोत्री देवी के बड़े बेटे स्व बैजनाथ यादव की पत्नी निर्मला देवी, पुत्र संजय यादव व बहू संगीता देवी कुछ ही दिनों पहले उनसे मिल कर गांव चकरपान आये थे. रविवार को ही सुबह चकरपान और फुलवरिया से उनके परिजन पटना आये और दोपहर में ही गंगोत्री देवी का पार्थिव शरीर लेकर चकरपान के लिए रवाना हो गये.

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