पटना : राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने मीडिया के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि प्रश्न पूछना किसी का अधिकार है तो ठीक उसी तरह उत्तर नहीं देना या देना किसी दूसरे का. मीडिया और उनके बीच हुई तीखी नोक-झोंक को लेकर आ रही रिपोर्टों पर एक अखबार के ट्विट पर जवाब में उन्होंने इसका कुछ इसी प्रकार से जवाब दिया.
इसके पहले अपने फेसबुक पर लालू प्रसाद ने एक पोस्ट के जवाब में लिखा कि ऐसे सड़क छाप चीं-चीं, चटर-पटर करने वाले पत्रकारों के अलोकतंत्रिक रवैये से ज्यादा भरोसा खुद के लोकतांत्रिक व्यवहार पर है. मैं हमेशा से प्रेस की स्वतंत्रता का पक्षधर रहा हूं, लेकिन आजकल की पत्रकारिता गुंडई में तब्दील हो रही है, हम लोगों ने इमरजेंसी वाला दौर देखा है. ये कल के लड़के हाथ में माइक थाम कर समझते हैं कि लोकतंत्र के वे सबसे बड़े रक्षक हैं.
इनके अपने मीडिया हाउस में लोकतंत्र क्या , काम करने और कराने का सामान्य तंत्र भी नहीं है. इनके पत्रकार, संपादक और मालिक सब संघी और जातिवादी प्रवृति के लोग है. ई सब बिका हुआ है. जितनी इनकी उम्र नहीं उतना वक्त हम जनता के बीच खड़े होकर माईक पर बोले है और ये कल के पुर्ज़े एसी कमरों में बैठकर हमें सिखा रहे है. इन सबका बैकग्राउंड जानता हूं, कैसे यहां कुंडली मारे बैठे है.
‘पत्रकारों का सम्मान, पर जो गुंडे बने हैं उनका नहीं’
पटना : लालू प्रसाद की दिल्ली में पत्रकारों से हुई बहस और कटिहार में राजद विधायक द्वारा पत्रकार से किये गये व्यवहार पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने बचाव के साथ-साथ हमला बोला है. उन्होंने कहा कि वे और उनके पिता पत्रकारों का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ गुंडे जो पत्रकार बन गये हैं उनका हम सम्मान नहीं करते हैं.
