पटना : बिहार प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि उप्र के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की पहली बिहार यात्रा निष्प्रभावी साबित हुई है. वह आये तो थे महागठबंधन में झगड़ा लगाने, लेकिन हमारी एकता को देखकर उन्हें उल्टे पांव लौटना पड़ा. उन्हें एहसास हो गया होगा कि बिहार में कांग्रेस, जदयू और राजद की एकता अटूट है.
सिंह ने कहा कि बिहार से शुरू महागठबंधन का प्रयोग अब राष्ट्रीय स्तर पर आकार लेने लगा है. इसका उदाहरण शीघ्र ही राष्ट्रपति के चुनाव में विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में एनडीए को देखने को मिलेगा. उप्र के मुख्यमंत्री अपना प्रदेश ही संभालें तो उनकी दक्षता प्रमाणित होगी. महागठबंधन में सेंधमारी का उनका प्रयास सिरे से निष्फल साबित होगा.
उन्होंने कहा कि देश की जनता अब समझ चुकी है कि भारत का शासन संभालना भाजपा के बूते की बात नहीं है. जो सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल में कोई भी वादा पूरा नहीं कर सकी, वह बाकी के दो साल से भी कम समय में अब क्या कर सकती है? केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मोदी सरकार के प्रचार के बदले लोक कल्याणकारी कार्यों में अपनी भागीदारी बढ़ाते तो अच्छा होता.
