Patna News: पटना में खुले में मांस-मछली बेचने वालों पर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. नगर आयुक्त यशपाल मीणा के निर्देश पर एक महीने के भीतर शहरभर में चलाए गए. सर्वे में 1420 दुकानों की पहचान की गई.
पटना नगर निगम की रडार पर 1420 दुकानें
पटना की गलियों और मुख्य सड़कों पर खुले में मांस-मछली की बिक्री अब गुजरे जमाने की बात होने वाली है. नगर आयुक्त यशपाल मीणा के कड़े रुख के बाद नगर निगम की टीम ने पूरे शहर में एक बड़ा सर्वे अभियान चलाया.
इस जांच के दौरान कुल 1420 मांस-मछली की दुकानों की पहचान की गई, जिनमें से मानकों की धज्जियां उड़ाने वाली 1135 दुकानों को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है.
मानकों की अनदेखी और ‘लाइसेंस’ से दूरी
नगर निगम ने लंबे समय से बंद पड़े लाइसेंस सिस्टम को फिर से शुरू किया है, ताकि दुकानदार नियमों के तहत कारोबार कर सकें. हालांकि, एक महीने में केवल 12 दुकानदारों ने ही लाइसेंस लिया है, जो चिंता का विषय है. कई आवेदनों को मानकों पर खरा नहीं उतरने के कारण खारिज भी कर दिया गया है.
मांस की दुकानों के लिए एक निश्चित ढांचागत व्यवस्था, साफ-सफाई के कड़े इंतजाम और पारदर्शी शीशों के पीछे बिक्री का प्रावधान है. राजधानी अंचल में सबसे ज्यादा सख्ती देखी गई, जहां 313 नोटिस जारी किए गए.
686 दुकानों पर लगा ‘ताला’
सर्वे के दौरान जो दृश्य सामने आया वह चौंकाने वाला था. करीब 686 दुकानदार ऐसे पाए गए जो सरेआम सड़क किनारे बिना किसी ढकाव के मांस और मछली बेच रहे थे. नगर निगम ने इन सभी दुकानों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है.
राजधानी अंचल में 299, पाटलिपुत्र में 145 और बांकीपुर में 139 दुकानों पर गाज गिरी है. पटना सिटी और अजीमाबाद जैसे इलाकों में भी टीम ने औचक निरीक्षण कर अवैध ठेलों और गुमटियों को हटाने का निर्देश दिया है.
क्या है निगम का अगला प्लान?
नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी धार्मिक स्थल या स्कूल के 100 मीटर के दायरे में मांस की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी.
आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होगा और जो दुकानदार नोटिस के बाद भी लाइसेंस नहीं लेंगे या खुले में बिक्री जारी रखेंगे, उनका सामान जब्त कर उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
