नेपाल में बाढ़ के बाद जिंदगी बेहाल, दवा-पानी खत्म; राहत शिविरों में महामारी का डर, लूटपाट भी शुरू

नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद अब लोगों के सामने जिंदगी बचाने की नई चुनौती खड़ी हो गई है. घर और सामान गंवा चुके बाढ़ पीड़ित दवा और साफ पानी के लिए जूझ रहे हैं. कई इलाकों में संपर्क टूटने से अस्पतालों में जरूरी दवाओं, ईंधन और अन्य सामान की किल्लत हो गई है. वहीं, कालाबाजारी और लूटपाट की खबरों ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों की चिंता और बढ़ा दी है.

Nepal flood crisis नेपाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. बाढ़ ने लोगों से पहले उनके घर छीने और अब दवा व पानी की कमी ने उनकी जिंदगी और मुश्किल कर दी है. नेपाल के कई इलाकों में लूटपाट शुरू होने की सूचनाएं भी सामने आ रही हैं. ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, बाढ़ के बाद पूरे देश में कालाबाजारी बढ़ गई है और रोजमर्रा की जरूरी चीजें मिलना मुश्किल हो गया है. पुल टूटने की वजह से कई अस्पतालों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है. मरीजों को इलाज के लिए लाने-ले जाने में हेलीकॉप्टर पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

अखबार के मुताबिक, अस्पतालों में जरूरी दवाओं की कमी हो गई है. रसोई गैस उपलब्ध नहीं है और एंबुलेंस के लिए डीजल भी कम पड़ रहा है. ऐसे में बाढ़ से बच गए लोग अब दवा, पानी और दूसरी जरूरी चीजों के लिए जूझ रहे हैं. राहत शिविरों में जल्द मदद नहीं पहुंची तो हालात और बिगड़ सकते हैं. साफ पानी, दवाओं और जरूरी सुविधाओं की कमी के बीच बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है.

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दवा और पानी का संकट गहराया

‘द काठमांडू पोस्ट’ ने स्थानीय लोगों के हवाले से बताया है कि बाढ़ के बाद देश में कालाबाजारी बढ़ गई है और रोजमर्रा की जरूरी चीजें मिलना मुश्किल हो गया है. सबसे ज्यादा परेशानी दवा और पानी को लेकर हो रही है. बाढ़ में कई दवा दुकानें बह जाने की वजह से जरूरी दवाओं की कमी हो गई है. लोगों को अपनी नियमित दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं. अखबार के अनुसार, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड जैसी पुरानी बीमारियों के मरीजों को भी जरूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं. प्रसव पीड़ा से परेशान कुछ महिलाओं को हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन दवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. त्रिशूली अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट राजेंद्र लामा ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के एक जगह रहने से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है. साफ पानी और पर्याप्त शौचालय नहीं होने की स्थिति में महामारी फैलने की आशंका भी है.

पुरानी बीमारियों वाले मरीज दवा के बिना परेशान

राहत शिविरों में पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. कई बाढ़ पीड़ितों के पास बोतलबंद पानी खरीदने के पैसे तक नहीं हैं. उनके कपड़े और दूसरी जरूरी चीजें भी बाढ़ में बह गई हैं. कई लोग अपने परिवार के सदस्यों से भी बिछड़ गए हैं. इन मुश्किल हालात के बीच शिविरों में रह रहे लोगों का कहना है कि उनके पास जो कुछ सामान बचा है, उसके भी चोरी होने का डर बना हुआ है. यानी बाढ़ से किसी तरह बच निकलने के बाद अब पीड़ितों के सामने दवा, पानी, भोजन और सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया है.

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By Rajeshkumar Ojha

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