Nawada News : नवादा जिले के रजौली प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में विकास के दावों की हकीकत सामने आ गई है. धमनी-बुढ़ियासाख-चटकरी मार्ग की बदहाल स्थिति के कारण दर्जनों गांवों के लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं. टूटी सड़क, गहरा कीचड़ और अस्थायी ह्यूम पाइप वाली पुलिया ग्रामीणों, शिक्षकों और स्कूली बच्चों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है.
पिछले साल बहा पुल, आज भी अस्थायी व्यवस्था के भरोसे आवागमन
धमनी और बुढ़ियासाख के बीच सरियो गांव के पास नदी पर बना पक्का पुल पिछले वर्ष तेज बारिश में बह गया था. घटना के बाद अधिकारियों ने निरीक्षण कर स्थायी पुल निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक केवल ह्यूम पाइप डालकर मिट्टी भरने की अस्थायी व्यवस्था ही की गई. बरसात में फिर मिट्टी का कटाव शुरू हो गया है और ह्यूम पाइप धंसने लगे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
80 किलोमीटर घूमकर मुख्यालय पहुंचने की मजबूरी
सड़क की बदहाली के कारण सवैयाटांड़ पंचायत के लोगों का रजौली मुख्यालय से सीधा संपर्क लगभग टूट चुका है. आवश्यक कार्य होने पर ग्रामीणों को झारखंड के कोडरमा होते हुए करीब 80 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर रजौली पहुंचना पड़ता है. इससे समय और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ रही है.
शिक्षक और स्कूली बच्चे हर दिन उठा रहे जोखिम
इस मार्ग से रजौली और अकबरपुर के शिक्षक-शिक्षिकाएं बुढ़ियासाख, चटकरी, सिमरातरी, झलकडीहा, बाराटांड़, बसरौन और सपही सहित कई गांवों के स्कूलों तक पहुंचते हैं. कई स्थानों पर सड़क इतनी खराब है कि बाइक पर एक ही व्यक्ति बैठकर गुजर सकता है, जबकि दूसरे को पैदल चलना पड़ता है. शिक्षकों का कहना है कि ह्यूम पाइप वाली पुलिया पार करते समय हर पल हादसे का डर बना रहता है.
डीएम के दौरे के बाद जगी उम्मीद
हाल ही में जिलाधिकारी रवि प्रकाश, अपर समाहर्ता अनिल तिवारी, एसडीएम स्वतंत्र कुमार सुमन, एसडीपीओ गुलशन कुमार और बीडीओ संजीव झा ने सवैयाटांड़ पंचायत का दौरा किया. अधिकारियों ने लौटते समय इसी जर्जर मार्ग का उपयोग किया, जिससे ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि अब प्रशासन इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाएगा.
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
उप प्रमुख विनोद राजवंशी, मुखिया नारायण सिंह, ब्रह्मदेव सिंह, पिंटू साव, भोला तुरिया समेत कई ग्रामीणों ने सड़क और पुलिया का शीघ्र स्थायी निर्माण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि बरसात में एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी समय पर गांव तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे.
