Nawada News : नवादा कार्यालय. बीपीएससी की ओर से आयोजित होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर लगातार बदलाव की घोषणाओं से परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ रहा है. परीक्षा के लिए 1 सितंबर से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने का नोटिफिकेशन जारी किया गया है, लेकिन अभ्यर्थियों का आक्रोश सिलेबस और परीक्षा की नयी व्यवस्था को लेकर है. छात्रों का कहना है कि सरकार पारदर्शी और स्पष्ट नीति नहीं बनाती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
परीक्षा व्यवस्था में बदलाव से बढ़ा कंफ्यूजन
TRE-4 और बीपीएससी की अन्य परीक्षाओं को लेकर जिले के अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के मूड में हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी के बीच बार-बार नियमों और सिलेबस में बदलाव किए जाने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है. उनका आरोप है कि परीक्षा समय पर नहीं होने से अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है.
छात्रों ने रखी अपनी मांगें
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि TRE-4 की परीक्षा पूर्व में आयोजित TRE-3 की तर्ज पर एकल परीक्षा के रूप में करायी जाए. इसके अलावा निगेटिव मार्किंग हटाने और डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग की गयी है. छात्रों ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग भी उठायी है. साथ ही परीक्षा कैलेंडर जारी करने, लंबित परीक्षाओं की प्रक्रिया शुरू करने और सभी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है.
'रोज नये नियमों से तैयारी पर पड़ रहा असर'
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार परीक्षा समय पर आयोजित नहीं कर रही है. परीक्षा में पारदर्शिता के नाम पर लगातार नये नियम बनाए जाने से परीक्षार्थी भ्रमित हो रहे हैं. उनका कहना है कि इससे वे परीक्षा की तैयारी पर पूरी तरह फोकस नहीं कर पा रहे हैं.
एकल परीक्षा और निगेटिव मार्किंग हटाने की मांग
प्रियंका कुमारी, विद्यार्थी ने कहा कि TRE-4 में एकल परीक्षा हो, निगेटिव मार्किंग हटे और डोमिसाइल नीति लागू हो, इन मांगों को लेकर वे आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि करीब ढाई वर्ष पहले TRE-3 की परीक्षा हुई थी. उसी तर्ज पर TRE-4 की परीक्षा भी आयोजित की जानी चाहिए.
लंबित परीक्षाओं की प्रक्रिया शुरू करने की मांग
सावित्री कुमारी, विद्यार्थी ने कहा कि परीक्षा कैलेंडर जारी नहीं होने और लंबित परीक्षाओं की प्रक्रिया शुरू नहीं किए जाने से विद्यार्थियों में आक्रोश है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विद्यार्थियों के लिए मनमाने नियम बना रही है, जिसका विरोध सड़कों पर दिखाई दे रहा है.
सिलेबस स्पष्ट नहीं होने से परेशानी
संगीता कुमारी, विद्यार्थी ने कहा कि भर्ती में समान अवसर और पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए. पिछली बार की अपेक्षा इस बार की परीक्षा का सिलेबस अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है. ऐसे में परीक्षा की तैयारी के लिए किन विषयों और पाठ्यक्रम पर फोकस करना है, यह समझना मुश्किल हो रहा है.
'सरकार की दोहरी नीति नहीं चलेगी'
संजू कुमारी, विद्यार्थी ने कहा कि सरकार की यह दोहरी नीति विद्यार्थियों पर नहीं चलेगी. एक ओर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षक के कई पद खाली हैं, लेकिन सरकार रिक्तियां नहीं निकाल रही है.
'हक के लिए सड़क पर उतरेंगे'
पूजा कुमारी, विद्यार्थी ने कहा कि विद्यार्थियों को सरकार से न्याय चाहिए. अपने हक की मांग के लिए वे सड़क पर उतरेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार न तो शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त उपाय कर रही है और न ही रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है. दोनों स्तरों पर सरकार पूरी तरह विफल दिखाई दे रही है. ऐसे में बेरोजगार युवा आखिर क्या करें.
'परीक्षा में पारदर्शिता और स्पष्ट नीति जरूरी'
अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए. सिलेबस, परीक्षा पैटर्न, परीक्षा कैलेंडर और भर्ती प्रक्रिया की जानकारी समय पर उपलब्ध करायी जाए, ताकि अभ्यर्थी बिना किसी भ्रम के तैयारी कर सकें. विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
रूपा कुमारी, विद्यार्थी
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