नवादा. नालसा एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर मंगलवार को व्यवहार न्यायालय में बंधुआ श्रम प्रणाली और मानव तस्करी से जुड़े कानूनों पर पारा विधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) के लिए एकदिवसीय प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गयी. जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जन जागरण संस्थान एवं इंटरनेशनल जस्टिस मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार आशुतोष कुमार झा ने किया.
पीड़ितों की पहचान कर विधिक सहायता से जोड़ने की अपील
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशुतोष कुमार झा ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य मानव तस्करी की रोकथाम और बंधुआ श्रम प्रणाली के उन्मूलन के लिए पीएलवी को कानूनी जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है. उन्होंने बिहार में बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी की गंभीर समस्या पर चर्चा करते हुए ईंट-भट्ठों पर बंधुआ मजदूरी के मामलों को भी रेखांकित किया.
उन्होंने पीएलवी से ऐसे मामलों की पहचान कर पीड़ितों को समय पर विधिक सहायता और आवश्यक सेवाओं से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की.
तीन सत्रों में कानून और पहचान के तरीके बताये
कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किये गये. महिमा विकल ने मानव तस्करी की अवधारणा, स्वरूप, कानूनी पहलुओं और रोकथाम के उपायों की जानकारी दी.
अधिवक्ता सत्यम सिन्हा ने बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के प्रावधानों, श्रमिकों के अधिकारों और कानूनी संरक्षण पर प्रकाश डाला. वहीं, अधिवक्ता शुभम कुमार ने बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी के पीड़ितों की पहचान के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी केस स्टडी के माध्यम से दी.
विशेष सेल की पहली बैठक में बनी रणनीति
प्रशिक्षण के बाद नवगठित विशेष सेल की पहली बैठक आयोजित की गयी. इसमें नालसा की असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विधिक सेवाएं योजना, 2015 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पीड़ितों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के लिए रणनीति तैयार करने पर विमर्श हुआ.
मौके पर सचिव डीएलएसए अरविन्द कुमार समेत न्यायिक पदाधिकारी, पैनल अधिवक्ता, संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि और प्रशिक्षु पीएलवी मौजूद रहे.
