Nawada News (नोखा से रंजन कुमार की रिपोर्ट): एक ओर नगर प्रशासन स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर नोखा नगर क्षेत्र में प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग और कारोबार बेखौफ जारी है. सरकारी आदेशों के बावजूद बाजारों में दुकानदार ग्राहकों को खुलेआम प्लास्टिक थैले उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
बाजारों में खुलेआम हो रहा प्लास्टिक का उपयोग
नगर के सब्जी बाजार, किराना दुकानें, फल मंडी, मिठाई प्रतिष्ठान तथा अन्य व्यावसायिक केंद्रों पर सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग सामान्य रूप से देखा जा सकता है. कई दुकानदार ग्राहकों की सुविधा का हवाला देकर प्रतिबंधित सामग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर इसकी बिक्री भी जारी है.
समाजसेवियों ने उठाए सवाल
स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर जागरूकता की बातें तो की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिख रही है. समाजसेवी राजा राम पटेल, संजय कुमार और कमलेश कपूर ने बताया कि मुख्य बाजार, गोला रोड समेत अन्य व्यस्त इलाकों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग हो रहा है, लेकिन कार्रवाई न के बराबर दिखाई देती है.
तीन वर्षों में जब्त हुआ तीन क्विंटल प्लास्टिक
जानकारी के अनुसार, नगर परिषद द्वारा पिछले तीन वर्षों में चलाये गये अभियान के दौरान करीब तीन क्विंटल प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त किया गया तथा लगभग 46 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया. बावजूद इसके बाजारों में प्लास्टिक का उपयोग कम नहीं हुआ है. लोगों का मानना है कि नियमित छापेमारी और कठोर दंडात्मक कार्रवाई से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है.
पर्यावरण और पशुओं के लिए भी खतरा
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक कचरा नालियों को जाम करने के साथ मिट्टी और जलस्रोतों को भी प्रदूषित करता है. वहीं आवारा पशुओं द्वारा इसे निगल लेने से उनके जीवन पर भी खतरा उत्पन्न हो जाता है.
जांच अभियान और तेज करने की तैयारी
इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान चलाने के लिए टीम गठित कर दी गयी है. उन्होंने कहा कि जांच अभियान को और तेज किया जायेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. साथ ही नागरिकों से कपड़े और जूट के थैलों के उपयोग की अपील की गयी है.
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