Nawada News : नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड में सामान्य से कम बारिश के कारण धान रोपनी की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है. पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान निजी बोरिंग और पंपसेट के सहारे सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. बिजली संकट ने भी किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 29 प्रतिशत धान रोपनी
प्रखंड कृषि पदाधिकारी आयुष राज ने बताया कि गोविंदपुर में इस वर्ष 3,697.85 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इसके मुकाबले अब तक केवल 1,106.20 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान की रोपनी हो सकी है, जो कुल लक्ष्य का करीब 29 प्रतिशत है. उन्होंने बताया कि जुलाई में अब तक केवल 119.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है. आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर रोपनी की गति बढ़ने की उम्मीद है.
'अब तक की बारिश से महज 5% फायदा'
विशुनपुर गांव के किसान मुकेश नाथ वर्मा, रंजीत कुमार, सरजू महतो, सरवीन कुमार, शैलेश कुमार और गनौरी महतो ने बताया कि अब तक हुई बारिश खेती के लिए पर्याप्त नहीं रही. उनका कहना है कि इससे फसलों को महज पांच प्रतिशत ही लाभ मिला है. अधिकांश किसान अब भी वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था के भरोसे खेती कर रहे हैं.
बोरिंग और पंपसेट से बढ़ रही खेती की लागत
किसानों ने बताया कि खेतों में पानी पहुंचाने के लिए निजी बोरिंग और पंपसेट का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे डीजल और बिजली पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है. वहीं विशुनपुर गांव में ट्रांसफार्मर जला होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित है, जिससे बोरिंग के जरिए सिंचाई भी प्रभावित हो रही है.
किसानों ने की ट्रांसफार्मर बदलने और सिंचाई व्यवस्था सुधारने की मांग
किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई और जले हुए ट्रांसफार्मरों को बदलकर नियमित बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो धान उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. कृषि विभाग ने किसानों से मौसम पर नजर रखने, उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करने और आवश्यकता पड़ने पर विभागीय सलाह लेने की अपील की है. वहीं किसानों ने प्रशासन से सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है.
