Nawada Train Accident(प्रेम कुमार): बिहार के नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है. नवादा से गयाजी जाने वाली मुख्य रेलखंड पर हिसुआ और मंझवे के बीच शनिवार को ट्रेन की चपेट में आने से तीन गर्भवती भैंसों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. इस भीषण हादसे में भैंसों के दो छोटे बच्चे भी बुरी तरह लहूलुहान और घायल हो गए हैं. इस हृदय विदारक घटना के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं पशुपालक परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
रेलवे ट्रैक के पास चराने गए थे मवेशी, काल बनकर आई तेज रफ्तार ट्रेन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेसकौर के बेलवान गांव निवासी रामबालक यादव अपनी दो गर्भवती भैंसों और नरेश यादव अपनी एक गर्भवती भैंस को उनके छोटे बच्चों के साथ चराने के लिए चित्रघटी गांव के समीप रेलवे लाइन के पास गए थे. पशु आशियाने के पास घास चर रहे थे, तभी अचानक नवादा की तरफ से बेहद तेज रफ्तार में आ रही ट्रेन वहां से गुजरी. जब तक पशुपालक कुछ समझ पाते या मवेशियों को पटरी से दूर हटा पाते, तीनों भारी-भरकम गर्भवती भैंसें ट्रेन की चपेट में आ गईं और उनके परखच्चे उड़ गए.
भैंस ने पटरी पर ही तोड़ा दम
| पीड़ित पशुपालक | मारे गए मवेशियों का ब्योरा | वर्तमान स्थिति व आर्थिक आघात |
| रामबालक यादव | 2 गर्भवती भैंसें मारी गईं, आजीविका का एकमात्र सहारा खत्म. | रो-रोकर बुरा हाल; परिवार के सामने अब दाने-दाने का संकट खड़ा हो गया है. |
| नरेश यादव | 1 गर्भवती भैंस की मौत, 2 बच्चे गंभीर रूप से घायल. | चमत्कार और त्रासदी: मरते समय भैंस ने ट्रैक पर ही बच्चे को जन्म दिया. |
“वही हमारे जीने का सहारा थीं…” तड़प उठे पशुपालक, प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
इस खौफनाक हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि रामबालक और नरेश यादव की भैंसें पूरी तरह गर्भवती थीं और उनके बच्चे जन्म लेने ही वाले थे. नरेश यादव ने सुबकते हुए बताया कि ट्रेन की इतनी भीषण टक्कर के बाद भी ममता की एक अनोखी और दर्दनाक मिसाल दिखी, एक भैंस ने मरते-मरते रेलवे ट्रैक पर ही तड़पते हुए अपने बच्चे को जन्म दे दिया और खुद दम तोड़ दिया.
एक साथ तीन दुधारू और गर्भवती भैंसों की असामयिक मौत ने दोनों गरीब परिवारों को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है. पीड़ितों ने बताया कि इन भैंसों का दूध बेचकर ही उनके पूरे परिवार का भरण-पोषण और चूल्हा जलता था, जो कि उनकी मुख्य आजीविका थी. इस हादसे से उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई है. घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में ट्रैक पर जुट गए और पीड़ित पशुपालकों को ढांढस बंधाया. ग्रामीणों और पशुपालकों ने जिला प्रशासन और आपदा विभाग से इस संकट की घड़ी में तुरंत आर्थिक सहायता (मुआवजा) देने की पुरजोर गुहार लगाई है.
