Nawada Becoming Army Officer: नवादा जिले के सकरा गांव निवासी सेवानिवृत्त नायब सूबेदार धर्मेंद्र कुमार के लिए सोमवार का दिन गर्व और उपलब्धि का दिन रहा. चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी की पासिंग आउट परेड में उनके बेटे निखिल कुमार ने सैन्य अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया. बेटे को अधिकारी की वर्दी में देखकर पिता भावुक हो उठे. सैन्य परंपरा के अनुसार पूर्व नायब सूबेदार धर्मेंद्र कुमार ने अपने अधिकारी बने बेटे को सैल्यूट किया. पिता और बेटे के इस पल ने परिवार के लिए लंबे सैन्य सफर को एक खास मुकाम दे दिया.
जिस कैप्टन से प्रभावित हुए, उसी के नाम पर रखा बेटे का नाम
धर्मेंद्र कुमार भारतीय सेना में सेवा के दौरान 23 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे. उस दौरान वह कैप्टन निखिल की प्लाटून में कार्यरत रहे. कैप्टन निखिल की नेतृत्व क्षमता, सैन्य अनुशासन और व्यक्तित्व से धर्मेंद्र कुमार काफी प्रभावित हुए. इसी दौरान उन्होंने तय किया कि अगर उनके घर बेटा हुआ तो उसका नाम निखिल रखेंगे.
वर्ष 2002 में जब उनके घर बेटे का जन्म हुआ, तो उन्होंने अपना संकल्प पूरा करते हुए उसका नाम निखिल रखा. तब शायद यह कल्पना भी नहीं की गयी होगी कि करीब 24 वर्ष बाद यही नाम पिता के लिए गर्व और भावुकता का कारण बनेगा.
दूसरे प्रयास में हासिल की सफलता
निखिल कुमार ने सैन्य अधिकारी बनने के लक्ष्य के लिए कड़ी मेहनत की. दूसरे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और चेन्नई की पासिंग आउट परेड में सैन्य अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया. बेटे को सैन्य अधिकारी की वर्दी में देखकर पिता धर्मेंद्र कुमार भावुक हो उठे.
पिता के बाद अब बेटा करेगा सेना में देश की सेवा
धर्मेंद्र कुमार ने भारतीय सेना में वर्षों तक सेवा दी है. अब उनका बेटा निखिल कुमार भी सैन्य अधिकारी बनकर देश की सेवा करेगा. निखिल की सफलता ने परिवार के साथ-साथ सकरा गांव को भी गौरवान्वित किया है. बेटे का सैन्य अधिकारी बनना धर्मेंद्र कुमार के लिए उस सपने के पूरा होने जैसा है, जिसे उन्होंने वर्षों पहले अपने सैन्य जीवन के दौरान संजोया था.
