नवादा से प्रेम कुमार की रिपोर्ट
Nawada News : वर्ष 2026का मलमास 15 जून को समाप्त हो गया. अब 11 साल बाद फिर ज्येष्ठ मास में मलमास पड़ेगा. वहीं इस बार आठ साल बाद ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम मास पड़ा था. भगवान विष्णु को समर्पित ज्येष्ठ मास में पड़ा अधिकमास (मलमास) अब समाप्त हो गया है. 15 जून को इसके समाप्त होने के बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास प्रारंभ हो गया है. वहीं, ज्येष्ठ मास में अधिकमास अब 11 साल बाद फिर पड़ेगा, जबकि अगला अधिकमास वर्ष 2029 में चैत्र मास में आएगा. इस बाबत ज्योतिषचार्य सिद्धनाथ पाण्डेय ने बताया की अगला मलमास वर्ष 2029 में 15 मार्च से 13 अप्रैल तक रहेगा. इस वर्ष मलमास के कारण ज्येष्ठ मास दो माह का हो गया है. ऐसे में 15 जून के बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास के 15 दिन शेष रहेंगे. इसकी पूर्णाहुति 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के साथ होगी. अधिकमास आठ वर्ष बाद ज्येष्ठ मास में पड़ा है. इससे पहले पिछला अधिकमास सावन मास में पड़ा था. ज्योतिषीय गणना के अनुसार अगला अधिकमास 2029 में चैत्र मास, 2031 में भाद्रपद मास, 2034 में आषाढ़ मास और 2037 में पुनः पड़ेगा. वहीं पिछले लगभग 40 वर्षों में 1988, 1999, 2007 और 2017 में ज्येष्ठ मास में अधिकमास पड़ चुका है.
16 जून से खुले शुभ कार्यों के द्वार, गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार फिर शुरू
सीतामढ़ी मंदिर के पुजारी सीताराम पाठक के अनुसार हिंदू पर्व-त्योहार चंद्रमा की स्थिति और उसकी गति पर आधारित होते हैं. दो मई से ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की शुरुआत हुई थी. इसके बाद 17 मई से अधिकमास का शुक्ल पक्ष प्रारंभ हुआ, जो 15 जून तक रहेगा. इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो 29 जून की ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगा. इस मास में पूजन-अर्चन और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है. इसी कारण विशेष तिथियों पर विष्णु मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. ज्येष्ठ मास में बड़े मंगल का भी विशेष महत्व है. मान्यता है कि इसी मास में भगवान श्रीराम और हनुमानजी का मिलन हुआ था. इस बार ज्येष्ठ मास दो माह का होने के कारण आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं. इसके चलते हनुमान मंदिरों में पूजन-अर्चन और भंडारे का सिलसिला लगातार जारी है. मलमास 15 जून को समाप्त होने के साथ ही 16 जून से मांगलिक कार्य शुरू हो गए. कटघरा शिव मंदिर के पुजारी नरेश पाठक ने बताया कि मलमास समाप्त होने के बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास में गृह प्रवेश, मुंडन आदि मांगलिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे. जबकि विवाह आदि के लिए शुभ लग्न मुहूर्त 18 जून के बाद से बन रहे हैं.
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