नवादा के पूर्व CO भोला पासवान को 4 साल की जेल, 12 साल पहले 4 हजार रुपये घूस लेते हुए थे गिरफ्तार

Nawada Bribery Case Verdict : नवादा के तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को 12 साल पुराने रिश्वत मामले में विशेष निगरानी न्यायालय ने दोषी ठहराया है. उन्हें चार साल सश्रम कारावास और जुर्माने की सज़ा सुनाई गई है. यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालत के सख्त रुख को दर्शाता है.

Nawada Bribery Case Verdict : नवादा में भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में विशेष निगरानी न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है. रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को 12 वर्ष पुराने रिश्वतखोरी मामले में दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है.

12 साल पुराने मामले में आया अदालत का फैसला

नवादा जिले के रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को करीब 12 वर्ष पुराने रिश्वतखोरी मामले में विशेष न्यायालय निगरानी, पटना ने दोषी करार दिया है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना की ओर से बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार विशेष न्यायालय के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने निगरानी थाना कांड संख्या 75/2014 (विशेष वाद संख्या-72/2014) में सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया.

जमीन विवाद के मामले में मांगी थी 4 हजार रुपये की रिश्वत

मामला नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के समरैठा गांव निवासी राकेश कुमार की शिकायत से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान ने जमीन विवाद से संबंधित मामले में दरवाजा, खिड़की और छज्जा लगाने की अनुमति देने के बदले चार हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी.

रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए हुए थे गिरफ्तार

शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया. आरोप सही पाए जाने पर 15 अक्टूबर 2014 को विशेष टीम ने जाल बिछाकर भोला पासवान को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया.

मजबूत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर हुई दोषसिद्धि

मामले की जांच तत्कालीन पुलिस निरीक्षक वीरेन्द्र नारायण सिंह ने की और समय पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों की गवाही कराई गई. बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक रीतेश कुमार ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया.

चार वर्ष का सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा

विशेष न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. वहीं धारा 13(2) सहपठित 13(1)(डी) के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया. अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. न्यायालय ने दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया.

2026 में भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार हो रही दोषसिद्धि

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के 11 मामलों में न्यायालय दोषसिद्धि कर चुका है. इनमें तीन मामले नवादा जिले से जुड़े हैं. इससे पहले फरवरी में ग्रामीण विकास विभाग के जूनियर इंजीनियर जयराम सिंह को तीन हजार रुपये रिश्वत लेने के मामले में तथा मई में बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर सुदामा राय को 300 रुपये रिश्वत लेने के मामले में सजा सुनाई जा चुकी है. ब्यूरो का कहना है कि प्रभावी अनुसंधान और मजबूत अभियोजन के कारण भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार दोषियों को सजा मिल रही है.

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Author: Ashutosh kumar

Published by: Sakshi Kumari

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