Nawada News: नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र के बरेब गांव की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी धार्मिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द में दिखाई देती है. गांव में एक ही परिसर में शिव मंदिर और करबला स्थित है. सावन के पवित्र महीने में जहां श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, वहीं मुहर्रम के अवसर पर इसी परिसर में ताजिए का पहलाम किया जाता है. वर्षों से चली आ रही यह परंपरा गांव के आपसी भाईचारे और एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं के सम्मान का प्रतीक बनी हुई है.
सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं भीड़
सावन के महीने में शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. लोग दूर-दूर से जल लेकर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय हो जाता है और श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होते हैं.
मुहर्रम में होता है ताजिए पहलाम
वहीं मुहर्रम के अवसर पर करबला में ताजिए लेकर लोग पहुंचते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक रस्में निभाते हैं. इस दौरान गांव के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आयोजन में सहयोग करते हैं. मंदिर और करबला का एक साथ होना बरेब के सामाजिक ताने-बाने और आपसी विश्वास को दर्शाता है.
धार्मिक सौहार्द की मिसाल है गांव
बरेब की यह परंपरा आज के समय में धार्मिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश करती है. यहां मंदिर और करबला केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक एकता के प्रतीक भी हैं. ग्रामीणों का मानना है कि धर्म और पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन आपसी सम्मान, प्रेम और इंसानियत लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है. यही परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती रहेगी.
Also Read: नवादा में दो पक्षों में मारपीट, सोने के आभूषण छीनने का आरोप, प्राथमिकी दर्ज
