Aurangabad News : नवादा सदर. करीब 16 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2010 के चर्चित हत्या कांड में गुरुवार को एडीजे-2 सदर न्यायालय, नवादा ने बड़ा फैसला सुनाया. सिरदला थाना कांड संख्या 139/10 में न्यायालय ने दो अभियुक्तों को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत के इस फैसले को लंबे समय से लंबित गंभीर आपराधिक मामलों में न्याय की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
हत्या समेत विभिन्न धाराओं में हुई सजा
अपर लोक अभियोजक दीपक कुमार ने बताया कि 9 अक्टूबर 2010 को दर्ज मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और न्यायिक परीक्षण के आधार पर न्यायालय ने सिरदला थाना क्षेत्र निवासी रंजीत चौधरी और जयमंती देवी को दोषी पाया.
अदालत ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
हत्या के प्रयास और मारपीट में भी सजा
न्यायालय ने धारा 307/34 के तहत दोनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. इसके अलावा धारा 323/34 के तहत एक-एक वर्ष के कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की भी सजा दी गई. जुर्माना नहीं जमा करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा.
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया फैसला
करीब 16 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं है. न्यायालय के इस निर्णय को पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की महत्वपूर्ण उपलब्धि तथा गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक व्यवस्था की दृढ़ता का प्रतीक माना जा रहा है.
