Ganesh chaturthi: रजौली प्रखंड क्षेत्र में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. इस अवसर पर समूचे रजौली प्रखंड के श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है. रजौली बाजार स्थित संगत के समीप और हरदिया सेक्टर-ए में दिलीप सिंह के घर के पास समेत कई प्रमुख स्थलों पर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित की जायेगी. आयोजन समितियों की ओर से श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए भव्य व आकर्षक पूजा पंडालों का निर्माण कराया गया है. पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी से सजाया गया है.
भजन-कीर्तन की गूंज और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
गणपति बप्पा के आगमन को लेकर भक्तों में उमंग का माहौल है. विभिन्न पूजा स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भजन और कीर्तन के विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान गणेश का पूजन-दर्शन करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
वहीं, पूजा के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने के लिए रजौली प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है. सभी प्रमुख पंडालों पर पुलिस प्रशासन की तैनाती रहेगी, ताकि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सकें.
गणपति स्थापना के लिए 2 घंटे 29 मिनट का शुभ मुहूर्त
प्रसिद्ध पंडित पप्पू शास्त्री ने पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष गणपति स्थापना और पूजन के लिए श्रद्धालुओं को कुल 2 घंटे 29 मिनट का शुभ समय मिल रहा है. गणेश चतुर्थी पर बप्पा की स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 01:31 बजे तक रहेगा.
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि पूजन का समय शुरू होने से पहले ही अपनी तमाम तैयारियां पूरी कर लें, ताकि शुभ समय के दौरान विधि-विधान से बप्पा को विराजित किया जा सके.
पूजन सामग्री और स्थापना की संपूर्ण विधि
गणेश जी की स्थापना के लिए पूजन सामग्री में रोली, अक्षत, चंदन, ताजा पुष्प, दूर्वा, धूप, दीपक और कपूर शामिल हैं. इसके साथ ही कलश, नारियल और ऋतु फल भी अर्पित किये जाते हैं. भगवान गणेश को मोदक का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है. इसलिए मोदक के अलावा घर में बने शुद्ध पकवान या मिठाइयों का प्रसाद तैयार रखा जाता है.
निर्धारित शुभ मुहूर्त में श्री गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर विराजित किया जाता है. इसके बाद भगवान को रोली और चंदन का तिलक लगाकर अक्षत, दूर्वा और पुष्प श्रद्धापूर्वक अर्पित किये जाते हैं. अंत में मोदक का भोग लगाकर परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भगवान गणेश की आरती करते हैं और उनका ध्यान करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस प्रकार गणेश जी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और शुभ कार्यों में आने वाली विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं.
