Nawada News : नवादा के वारिसलीगंज प्रखंड में साइबर अपराध का बढ़ता नेटवर्क प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब दो दशक पहले तक क्षेत्र के युवाओं को साइबर ठगी या ऑनलाइन अपराध की जानकारी भी नहीं थी, लेकिन पड़ोसी नालंदा जिले के कतरीसराय क्षेत्र के संपर्क में आने के बाद धीरे-धीरे कई गांवों में यह अवैध कारोबार तेजी से फैल गया. आज स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में युवा इस धंधे से जुड़ चुके हैं.
तेजी से बढ़ा साइबर ठगी का नेटवर्क
स्थानीय लोगों के अनुसार, कम समय में अधिक पैसे कमाने की चाहत ने कई युवाओं को साइबर अपराध की ओर आकर्षित किया. जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति पहले कमजोर थी, उनके पास आज आलीशान मकान, महंगी गाड़ियां और अन्य संपत्तियां दिखाई देती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी जीवनशैली देखकर अन्य युवा भी इस धंधे की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
पुलिस कार्रवाई के बावजूद नहीं लग रही लगाम
क्षेत्र में समय-समय पर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाकर कई आरोपितों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई के दौरान नकदी, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, पासबुक और अन्य दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद कई आरोपित फिर से इस अवैध कारोबार में सक्रिय हो जाते हैं, जिससे इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है.
एक सप्ताह में 12 साइबर अपराधी गिरफ्तार
स्थानीय पुलिस ने हाल के दिनों में लगातार कार्रवाई करते हुए एक सप्ताह के भीतर 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया है. इनमें 16 जुलाई को झौर और पैंगरी गांव से आठ, 19 जुलाई को कोरमा और सिमरी विगहा से तीन तथा 20 जुलाई को गोड़ापर गांव से एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने इनके पास से साइबर अपराध में प्रयुक्त सामग्री भी बरामद की है.
सख्त कार्रवाई की उठी मांग
स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल गिरफ्तारी से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. उनका कहना है कि साइबर अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों की जब्ती और नियमानुसार कार्रवाई से ही इस धंधे पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है. साथ ही युवाओं को जागरूक कर उन्हें वैकल्पिक रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने की भी आवश्यकता है.
