Nawada News : रजौली नगर पंचायत क्षेत्र के महसई मोहल्ला स्थित मथुरासानी कॉलेज के समीप शिव मंदिर परिसर में शुक्रवार को भूदान किसान परिषद की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे की जयंती मनायी गयी. कार्यक्रम में परिषद के सदस्यों ने आचार्य विनोबा भावे के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया.
गांधीवादी विचारों और भूदान आंदोलन को किया याद
परिषद के संचालक मिथिलेश चौधरी और अरुण कुमार ने कहा कि आचार्य विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर 1895 को हुआ था. वे गांधीवादी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और भूदान आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार थे. वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत को युद्ध में झोंके जाने के विरोध में महात्मा गांधी ने व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू किया था. इसमें विनोबा भावे को पहला सत्याग्रही चुना गया था.
उन्होंने कहा कि विनोबा भावे रचनात्मक कार्यक्रमों को सामाजिक बदलाव का माध्यम मानते थे. उनके विचारों और भूदान आंदोलन ने समाज में शांति, समानता और सहयोग की भावना को मजबूत करने का काम किया.
भूदान यज्ञ कमेटी को बहाल करने की मांग
भूदान परिषद रजौली अंचल के अध्यक्ष मिथिलेश चौधरी ने सरकार से बिहार प्रदेश भूदान यज्ञ कमेटी को बहाल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि जिन भूदान किसानों को जमीन का पर्चा मिल चुका है, उनका दाखिल-खारिज कर रसीद काटने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि कई भूदान जमीन के पर्चे बांटे जा चुके हैं, लेकिन हाल के सर्वे में ऐसी जमीन बिहार सरकार के नाम दर्ज है. उन्होंने मांग की कि ऐसी जमीन को भूदान यज्ञ कमेटी के नाम दर्ज किया जाए.
रजौली के पर्चाधारियों की जमाबंदी बहाल करने की मांग
मिथिलेश चौधरी ने मौजा रजौली टोला, थाना नंबर 184 में जिन पर्चाधारियों की जमाबंदी रद्द कर दी गयी है, उसे बहाल करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि भूदान किसानों को जमीन का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और सरकार को लंबित मामलों का जल्द समाधान करना चाहिए.
दर्जनों भूदान किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में कारू राजवंशी, दीपू राजवंशी, दीपू कुमार, गिरिजा देवी, भोला राजवंशी, उपेंद्र राजवंशी, रामस्वरूप रविदास, नरेश रविदास, गीता देवी समेत दर्जनों भूदान किसान मौजूद रहे.
