Nawada News : बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न हुए करीब नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन चुनाव ड्यूटी में अपनी गाड़ियां उपलब्ध कराने वाले वाहन मालिकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है. चुनाव के दौरान प्रशासन के निर्देश पर निजी वाहन चुनाव कार्य में लगाए गए थे. उस समय वाहन मालिकों को आश्वासन दिया गया था कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद निर्धारित दर के अनुसार किराया और अन्य देय राशि का भुगतान कर दिया जाएगा. हालांकि, कई महीने बीत जाने के बावजूद भुगतान लंबित रहने से वाहन मालिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक संकट गहराया
वाहन मालिक उदय यादव, मो. मोनम और पप्पू सिंह ने बताया कि चुनाव ड्यूटी के दौरान उन्होंने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपनी गाड़ियां उपलब्ध कराई थीं. कई वाहन मालिकों को वाहनों की मासिक किश्त, बीमा, टैक्स और रखरखाव का खर्च लगातार वहन करना पड़ रहा है. ऐसे में नौ माह से भुगतान लंबित रहने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
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भुगतान की जानकारी के लिए कई बार लगाया कार्यालय का चक्कर
वाहन मालिकों का कहना है कि चुनाव के दौरान गाड़ियां उपलब्ध कराने के लिए उन्हें अपने निजी और व्यावसायिक कार्य भी स्थगित करने पड़े थे. उन्होंने बीडीओ सह प्रखंड निर्वाची पदाधिकारी राधा रमण मुरारी से कई बार भुगतान की स्थिति की जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन अब तक उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. उनका कहना है कि यदि किसी दस्तावेज या प्रक्रिया की कमी के कारण भुगतान रुका हुआ है, तो प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि आवश्यक कागजात उपलब्ध कराकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सके.
जिला प्रशासन से शीघ्र भुगतान कराने की मांग
वाहन मालिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से लंबित भुगतान जल्द जारी कराने की मांग की है. उनका कहना है कि चुनाव लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और इसमें सहयोग करने वाले वाहन मालिकों को समय पर भुगतान मिलना उनका अधिकार है. उनका यह भी कहना है कि यदि लंबे समय तक भुगतान लंबित रहा तो भविष्य में चुनावी कार्यों के लिए वाहन उपलब्ध कराने को लेकर लोगों का उत्साह प्रभावित हो सकता है.
क्या बोले बीडीओ
अकबरपुर के बीडीओ सह प्रखंड निर्वाची पदाधिकारी राधा रमण मुरारी ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया में अधिग्रहित वाहनों के भुगतान की प्रक्रिया जिला स्तर से की जाती है. ऐसे में भुगतान से संबंधित कार्रवाई भी जिला प्रशासन के माध्यम से ही पूरी होगी.
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