सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़, तालाब में फैली है गंदगी

NAWADA NEWS. बाबा भोलेनाथ के भक्त सुबह से ही मदिरों में जलाभिषेक और पूजा के लिए जुटे दिखे. ऐसा ही नजारा जिले का प्रसिद्ध पंचमुखी महादेव श्री शोभनाथ मंदिर में भी देखना को मिला.

पंचमुखी महादेव शोभनाथ मंदिर : आस्था, इतिहास और उपेक्षा की दास्तां

सावन महीने में यहां हजारों शिवभक्त पूजा के लिए पहुंचते हैं, तालाब और मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग

प्रतिनिधि, नवादा नगर

सावन का पावन महीना शुरू हो चुका है. बाबा भोलेनाथ के भक्त सुबह से ही मदिरों में जलाभिषेक और पूजा के लिए जुटे दिखे. ऐसा ही नजारा जिले का प्रसिद्ध पंचमुखी महादेव श्री शोभनाथ मंदिर में भी देखना को मिला. यहां सुबह से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक चलता रहा. बता दें कि पंचमुखी महादेव श्री शोभनाथ मंदिर जिले के लोगों के लिए न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसके गर्भ में ऐसा इतिहास छिपा है जो आस्था, चमत्कार से जुड़ा है. हर साल सावन महीने में यहां हजारों शिवभक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर पुण्य प्राप्त करते हैं.

कैसे हुआ था मंदिर का निर्माण

नवादा-गया पथ पर भदौनी स्थित इस मंदिर की स्थापना एक चमत्कारी घटना से हुई. बताया जाता है कि वर्ष 1931 में नवादा-हिसुआ पथ पर पुल निर्माण का कार्य हो रहा था, लेकिन, हर बार शिलान्यास के बाद पुल पानी में बह जाता था. जब संवेदक की नजर पास के ऊंचे टीले पर पड़ी और खुदाई कराई गयी, तब पंचमुखी शिवलिंग के दर्शन हुए. इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया तो कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो गया. उसी श्रद्धा से संवेदक ने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया और एक छोटे मंदिर का निर्माण कराया. हालांकि अब यह एक भव्य मंदिर के रूप में स्थापित हो चुका है.

पूजा और परंपराएं

मंदिर में रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं, पर विशेष रूप से प्रत्येक पूर्णिमा, सावन की सोमवारी और महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है. जिसमें दूर-दूर से शिवभक्त यहां आकर जलाभिषेक करने आते हैं. इतना ही नहीं, यह मंदिर जिले में सस्ती शादियों के आयोजन के लिए भी प्रसिद्ध है. हर साल करीब 10 हजार जोड़े यहां विवाह बंधन में बंधते हैं. पुत्र प्राप्ति की कामना पूरी होने पर मुंडन संस्कार कराने की भी परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें सालाना करीब 500 बच्चों का मुंडन संस्कार किया जाता है.

उपेक्षा के कारण मंदिर खोता जा रहा पुराना स्वरूप

अगर 90 के दशक की बात करें तो सावन की शुरुआत होते ही शहर के हर मोहल्ले से युवाओं की टोली सुबह चार बजे ही पैदल चलकर शोभनाथ मंदिर पहुंचती थी. शोभिया दूर है, जाना जरूर है. इस नारे के साथ हर ओर शिवभक्ति का उत्साह दिखाई देता था. मंदिर पहुंचने से पहले श्रद्धालु मंदिर परिसर स्थित तालाब में स्नान करते और फिर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते थे. लेकिन, अब समय बदल गया है. वो उत्साह, वो ऊर्जा, वो भक्ति का जनसैलाब अब कम होता जा रहा है.

जहां श्रद्धालु स्नान कर पूजा करते थे, वहां गंदे कपड़े धोये जाते हैं

मंदिर का प्रमुख तालाब आज जर्जर हालत में है. जहां कभी श्रद्धालु स्नान कर पूजा करते थे, आज वहां गंदे कपड़े धोये जाते हैं. देखरेख के अभाव में तालाब गंदगी का अड्डा बन चुका है. वहीं मंदिर परिसर के आसपास अवैध अतिक्रमण ने भी स्थिति को और बदतर बना दिया है. श्रद्धालु अब सुविधाओं की कमी और अव्यवस्था के कारण परेशान होते हैं.

पुजारी की उम्मीदें

शोभनाथ मंदिर के पुजारी सुनील पांडेय ने बताया कि सावन को देखते हुए तालाब की सफाई करवाई जा रही है. तालाब में दो ट्यूबवेल से पानी भरवाया जा रहा है. मंदिर की सफाई और मरम्मत का कार्य जारी है. उन्होंने यह भी कहा कि समाजसेवियों द्वारा रुके हुए निर्माण कार्य को जल्द शुरू कराने की बात कही गयी है. परंतु, अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है.

आखिर कब होगा सुधार

मंदिर की धार्मिक महत्ता को देखते हुए यह जरूरी है कि स्थानीय प्रशासन और समाजसेवी मिलकर इसके विकास और संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाएं. श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की गरिमा को बनाये रखना समय की मांग है. शोभनाथ मंदिर न केवल नवादा का गौरव है, बल्कि यह उस आस्था का केंद्र है, जो पीढ़ियों से लोगों के जीवन का हिस्सा रही है. जरूरत है तो बस एक समर्पित प्रयास की जिससे पंचमुखी महादेव का यह धाम फिर से अपनी खोई हुई पहचान को पा सके.

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Published by: Vikash kumar

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