नवादा नगर : ताड़ के प्रोडक्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकार पूरा जोर लगा रही है. सूर्योदय के पहले के ताड़ के रस से बनने वाले प्रोडक्ट को बनाने की विधि सीख कर कमाई बढ़ायी जा सकती है. ये बातें डीएम मनोज कुमार ने जीविका द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कहीं. नगर भवन में आयोजित कार्यशाला में डीएम ने कहा कि बिहार में पूर्ण रूपेण नशाबंदी लागू है.
ताड़ी के व्यवसाय से जुड़े लोगों को विकल्प के रूप में रोजगार से जोड़ने की पूरी योजना है. ताड़ी के बजाय अन्य प्रोडक्ट बना कर न केवल अच्छी कमाई होगी, बल्कि इससे बने उत्पाद स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होगा. नीरा से बने प्रोडक्ट को देख कर जिले में भी जल्द इसे शुरू किया जाना चाहिए.
ताड़ है एक कल्पवृक्ष : कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि नीरा से बने ताल मिश्री का इस्तेमाल हमलोग बहुत पहले से करते आ रहे हैं. नीरा से बनी मिश्री 12 सौ रुपये किलो मिलती है. ताड़ एक ऐसा उत्पाद है जिसके जड़ से लेकर पत्ते तक का उपयोग किया जाता है, इसलिए इसे कल्पवृक्ष भी कहते हैं. सूर्योदय के पहले छह डिग्री तापमान पर उतारे जाने वाले नीरा को सही तरीके से संरक्षित करके इससे कई तरह के प्रोडक्ट बनाये जा सकते हैं, इसके लिए सबको मिल कर काम करने की जरूरत है. नीरा के अलावे इसके दूसरे प्रोडक्ट कोवा, इसके पके फल तथा इसके गुठली को जमीन में दवा कर रखने के बाद बनने वाले परम के अलावे भी इससे अन्य प्रोडक्ट बनाये जा सकते हैं. तार के पत्ते व अन्य रेसों से सजा कर बनाये जाने वाले सजावटी प्रोडक्ट भी लोगों के आय का साधन बन सकता है.
तैयार प्रोडक्ट का प्रदर्शन : ताड़ से बनने वाले विभिन्न प्रोडक्ट का प्रदर्शन भी कार्यक्रम में किया गया. नीरा से बनी चीनी, गुड़, मिश्री, जैम, स्क्वैस, जूस के साथ ही तार के पत्तों से बने डलिया, फूल, बैग, पंखे आदि बना कर रखा गया था. ताड़ व्यवसाय से जुड़े महिलाओं व पुरुषों ने इन बनाये गये प्रोडक्ट को बनाने के हुनर सीखे.
कलेक्शन सेंटर बनाने की हो रही व्यवस्था: जिस प्रकार से सुधा दूध के लिए कंफेड द्वारा दूध का कलेक्शन गांव स्तर पर किया जाता है, उसी प्रकार से ताड़ से उत्पादित होने वाले नीरा के कलेक्शन के लिए कलेक्शन सेंटर बनाये जाने के साथ ही उत्पादित नीरा को बनने वाले चिलिंग प्लांट तक पहुंचा कर इससे प्रोडक्ट बनाने में इस्तेमाल करने के लिए पूरा तंत्र बनाये जाने की जानकारी दी गयी. छोटे किसानों को दो पहिया वाहन के शक्ल में चिलिंग गाड़ी दिये जाने की बात कही गयी, जिससे नीरा को संरक्षित करके इसे बेचा जा सके.
अधिकारी रहे सक्रिय : ताड़ के काम से जुड़े सिरदला, रजौली व अकबरपुर प्रखंड के महिलाओं व पुरुषों को पहले चरण में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ प्रेम शंकर कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र गया के डॉ अशोक कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र कौआकोल के डॉ कल्पना सिन्हा, डॉ सैयद आबिद इमाम आदि ने लोगों को प्रशिक्षित किया.
कार्यक्रम में तमिलनाडु में ट्रेनिंग के समय सीखे गये बातों के वीडियो भी दिखलाया गया. आयोजन को सफल बनाने में जीविका के प्रबंधक मुकेश सास्मल, जिला कृषि पदाधिकारी सुनील कुमार, उद्यान पदाधिकारी, पंकज कुमार, दिलीप कुमार, अनुपम कुमार, प्रेम शंकर, नितेश कुमार के अलावे अन्य लोग सक्रिय रूप से जुटे थे.
